मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: विकास और बुनियादी ढांचे पर 23,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च को मंजूरी

वन संरक्षण से लेकर सिंचाई, शहरी सुविधाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र तक कई योजनाओं को मिली वित्तीय स्वीकृति; पांच साल में वन विभाग की नौ योजनाओं पर खर्च होंगे 17,240 करोड़ रुपये से अधिक

भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 3 नवंबर को हुई मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में विकास, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप के अनुसार, बैठक में 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। इन फैसलों में वन एवं वन्यजीव संरक्षण, सिंचाई परियोजनाओं, नगरीय अधोसंरचना, चिकित्सा क्षेत्र में निवेश और लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए बजट का प्रावधान शामिल है।

वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के लिए 17,240 करोड़ रुपये

मंत्रिपरिषद ने वन विभाग की नौ प्रमुख योजनाओं के संचालन के लिए कुल 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खर्च की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदेश में वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता का संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है।

स्वीकृत राशि में सबसे बड़ा हिस्सा 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये कार्यकारी योजना संगठन एवं वन वृत्तों की स्थापना पर खर्च होगा। इसके अलावा क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख रुपये, राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख रुपये, इमारती लकड़ी उत्पादन के लिए 1,107 करोड़ 6 लाख रुपये और जू एवं रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

शेष राशि का उपयोग वन मुख्यालय की स्थापना, वन प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन, कार्य आयोजना तैयार करने और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यप्राणियों के प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जाएगा।

9 टाइगर रिजर्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों के संरक्षण पर जोर

वन विभाग की स्वीकृत योजनाओं के तहत प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों के संरक्षण एवं विकास के लिए कार्य किए जाएंगे। संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों की निगरानी, सघन गश्त, बाघों की मॉनिटरिंग और रेस्क्यू गतिविधियों को भी मजबूत किया जाएगा।

क्षतिपूर्ति वनीकरण के तहत विकास परियोजनाओं में वन भूमि के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए पौधरोपण और अन्य संरक्षण कार्य किए जाएंगे। वहीं, वनकर्मियों को प्रशिक्षित करने तथा वनों के सतत प्रबंधन के लिए 10 वर्षीय वैज्ञानिक कार्य योजनाएं तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

उज्जैन और जबलपुर में नए जू एवं रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की योजना भी इस स्वीकृति का हिस्सा है।

सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4,103 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर

मंत्रिपरिषद ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं के संचालन एवं संधारण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इन परियोजनाओं से कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने के साथ पेयजल और नदी के प्रवाह से जुड़ी जरूरतों को भी पूरा करने का लक्ष्य है।

इसमें प्रमुख परियोजनाओं के लिए राशि का प्रावधान इस प्रकार है—

– मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना, पन्ना: 69 करोड़ 36 लाख रुपये। इसके तहत बांध निर्माण कर 13,060 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विकसित की जा रही है।

– टेम मध्यम सिंचाई परियोजना, विदिशा: 277 करोड़ 52 लाख रुपये। इसका उद्देश्य 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देना और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है।

– सीतापुर हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना: 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाली इस परियोजना में सोन नदी पर बैराज बनाकर 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने की योजना है।

– सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना, उज्जैन: 136 करोड़ 3 लाख रुपये। इसके तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी बैराज बनाकर वर्षाकाल में पानी को सिलारखेड़ी बांध में संग्रहित किया जाएगा। जरूरत के अनुसार इस पानी को वर्षभर शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी।

शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए 700 करोड़ रुपये

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो साल के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह अवधि 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक रहेगी। योजना के लिए अतिरिक्त 700 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

इस राशि से नगरीय निकायों में पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, आपदा प्रबंधन और सड़कों एवं नालियों का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, खेल मैदान, मनोरंजन स्थलों और रैन बसेरों जैसी सुविधाओं के विकास पर भी खर्च किया जाएगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष में मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्धारित सीमा से अधिक, लेकिन 500 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव प्राप्त होने पर आवश्यकतानुसार प्रशासकीय स्वीकृति दी जा सकेगी। इसके लिए भविष्य में अतिरिक्त राशि की मांग वित्त विभाग से अलग से की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन

चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिपरिषद ने उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

यह राज्य पोषित योजना है। इसके तहत मध्यप्रदेश हेल्थ सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2020 और 2025 में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में पूंजीगत परिसंपत्तियां स्थापित करने वाले निवेशकों को सब्सिडी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य संबंधी उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करना तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए 573 करोड़ रुपये

मंत्रिपरिषद ने लोकायुक्त संगठन के सुचारु संचालन के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 573 करोड़ 85 लाख रुपये मंजूर किए हैं।

इसमें कार्यालय स्थापना, वेतन और अन्य कार्यालयीन खर्चों के लिए 553 करोड़ 85 लाख रुपये तथा विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से संगठन के प्रशासनिक और नियमित कामकाज को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के लिए नया पद मंजूर

जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के संचालन के लिए मंत्रिपरिषद ने सहायक अनुसंधान अधिकारी (संग्रहालय प्रभारी) का एक नियमित पद स्वीकृत किया है। इसके साथ ही संग्रहालय के संचालन और रखरखाव के लिए सालाना 83 लाख 18 हजार रुपये के व्यय को भी मंजूरी दी गई है।

इस पद पर नियुक्त अधिकारी संग्रहालय की नियमित व्यवस्था, देखरेख, प्रशासनिक कार्यों और जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। स्वीकृत राशि का उपयोग प्रशासनिक खर्च, बिजली-पानी, भवन के रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर किया जाएगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!