राज्योत्सव की कवरेज कर रहे पत्रकार से मारपीट, आरोपी आरक्षक निलंबित; पत्रकारों ने किया प्रदर्शन

खैरागढ़ में बंसल न्यूज के संवाददाता किशोर सोनी के साथ पुलिसकर्मी की कथित मारपीट का वीडियो वायरल, कार्रवाई के बाद भी उठे जवाबदेही के सवाल
खैरागढ़ ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आने के बाद खैरागढ़ में आक्रोश फैल गया। बंसल न्यूज के संवाददाता एवं जिला पत्रकार संघ के सदस्य किशोर सोनी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पत्रकारों ने फतेह सिंह मैदान के मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले में शिकायत के बाद सशस्त्र बल के आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, राज्योत्सव कार्यक्रम के दौरान किशोर सोनी समाचार संकलन कर रहे थे। इसी बीच किसी बात को लेकर उनका ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ हाथापाई और मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पत्रकारों में नाराजगी बढ़ गई।
मुख्य गेट पर धरने पर बैठे पत्रकार
घटना के विरोध में जिला पत्रकार संघ सहित जिले के अन्य पत्रकार फतेह सिंह मैदान के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। पत्रकारों ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जाए।

पत्रकारों का कहना है कि समाचार संकलन करना उनका पेशेवर दायित्व है। कवरेज के दौरान किसी तरह की आपत्ति या विवाद की स्थिति बनने पर पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। किसी पत्रकार के साथ मारपीट की घटना स्वीकार्य नहीं है।
शिकायत के बाद आरक्षक निलंबित
मामले में शिकायत के बाद सशस्त्र बल के आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। उपलब्ध आदेश संबंधी जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट को पुलिस सेवा की सामान्य शर्तों का उल्लंघन माना गया। इसके बाद आरक्षक को निलंबित कर वाहिनी मुख्यालय, राजनांदगांव में संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
आरक्षक के निलंबन के बाद अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर है। वायरल वीडियो तथा शिकायत में सामने आए तथ्यों की जांच के बाद यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विवाद किन परिस्थितियों में शुरू हुआ और मारपीट की घटना में किसकी क्या भूमिका रही।
यह मामला सार्वजनिक आयोजन में मीडिया की कवरेज, पुलिस के व्यवहार और जवाबदेही से जुड़ा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों से भी अनुशासन और संयम की अपेक्षा की जाती है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई ही इस मामले में भरोसा बहाल करने का आधार बनेगी।



