पुलिस अधिकारियों को CM मोहन यादव की दो टूक, 2029 तक नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का लक्ष्य

48 प्रशिक्षु डीएसपी की पासिंग आउट परेड में बोले मुख्यमंत्री—रील से ज्यादा रियल समस्याओं के समाधान पर दें ध्यान; 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
भोपाल ( शिखर दर्शन ) //
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवप्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों को प्रदेश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ बदलती अपराधी चुनौतियों से निपटने का संदेश दिया। भोपाल के भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में 3 नवंबर को आयोजित 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में नए अधिकारी रील बनाने से ज्यादा वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने पुलिस के सामने अगली बड़ी चुनौती नशे के कारोबार को बताते हुए वर्ष 2029 तक ड्रग्स की समस्या के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का लक्ष्य रखा।
मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी ली और उसका निरीक्षण किया। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री ने पुलिस अकादमी में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से ऑडिटोरियम निर्माण, विद्युत सब स्टेशन की स्थापना और एक किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड बनाने की घोषणा भी की। नक्सल विरोधी अभियान में योगदान देने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की जानकारी भी दी गई।
डाकुओं और नक्सलवाद के बाद अब नशे के खिलाफ चुनौती
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का इतिहास चुनौतियों से मुकाबले और उपलब्धियों का रहा है। आजादी के बाद प्रदेश के चंबल और रीवा अंचल में डाकुओं की समस्या लंबे समय तक गंभीर रही, लेकिन पुलिस जवानों ने साहस और रणनीति के साथ इस चुनौती का सामना किया और डाकुओं का उन्मूलन किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों में नक्सलवाद के कारण विकास प्रभावित हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य मध्यप्रदेश ने निर्धारित समय-सीमा से पहले हासिल किया। मुख्यमंत्री ने इसे पुलिस बल की कार्यक्षमता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
रील से ज्यादा रियल समस्याओं के समाधान पर दें ध्यान
नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का समय सोशल मीडिया का है, लेकिन पुलिस अधिकारियों के सामने सोशल मीडिया से अधिक सामाजिक समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी है। अधिकारी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें, लेकिन आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज न करें। समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनके समाधान पर ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि नए अधिकारी ऐसे बनें, जिनका सम्मान समाज के सभी वर्गों में समान रूप से हो। विशेषकर कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों के लिए संवेदनशीलता के साथ काम करें। पुलिस की पहचान केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि आम नागरिकों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा दिलाने से भी बनती है।
जीवन ऐसा बनाएं कि मृत्यु भी गौरवान्वित करे
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराधों के स्वरूप और चुनौतियों में भी बदलाव आया है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि कर्तव्य के मार्ग पर गंभीरता और समर्पण के साथ आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि जीवन एक बार मिलता है और मृत्यु सभी को आनी है। इसलिए जीवन ऐसा बनाना चाहिए कि मृत्यु भी उसे गौरवान्वित करे। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से वर्ष 2029 तक नशे के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने अवैध शराब के कारोबार और शराब माफिया के विरुद्ध भी निडर होकर कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई।
तीन साल में पुलिस विभाग में 17,710 पदों पर भर्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कल्याण की चिंता करना सरकार का दायित्व है। राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में पुलिस विभाग में 17 हजार 710 पदों पर भर्ती की है। कुल 22 हजार 500 पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। नव नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशिक्षण लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति के माध्यम से भी पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।
48 अधिकारियों में 20 महिलाएं, पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी भी प्रशिक्षित
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि पासिंग आउट परेड पुलिस सेवा के प्रत्येक अधिकारी के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होती है। वर्ष 2014 से डीएसपी स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण भोपाल के भौंरी स्थित पुलिस अकादमी में कराया जा रहा है। इस बैच में कुल 48 अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया है, जिनमें 20 महिला अधिकारी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी अकादमी में प्रशिक्षण दिया गया है। ये अधिकारी पुलिस की तकनीकी क्षमताओं और साइबर अपराधों से निपटने की व्यवस्था को मजबूत करेंगे। प्रशिक्षित अधिकारियों में 22 इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं।
डीजीपी ने कहा कि फील्ड में तैनात पुलिस अधिकारियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। सभी अधिकारी इसका पालन सुनिश्चित करें, क्योंकि कर्तव्य निर्वहन के साथ पुलिसकर्मियों की अपनी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
नशा और साइबर अपराध पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
डीजीपी मकवाना ने कहा कि प्रदेश में युवा पीढ़ी के बीच नशे का बढ़ता चलन गंभीर चुनौती है। मध्यप्रदेश पुलिस ने नशे से दूरी है जरूरी अभियान के तहत कार्रवाई की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2029 तक मध्यप्रदेश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में नए पुलिस अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके लिए साइबर थानों, साइबर हेल्प डेस्क, साइबर फॉरेंसिक और साइबर हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
समारोह में मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में योगदान देने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण अभियानों में साहस और समर्पण दिखाने वाले जवानों का सम्मान किया जाना चाहिए। सरकार बलिदानी पुलिसकर्मियों के योगदान को सदैव याद रखेगी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को प्रदेशभर में अवैध शराब के कारोबार और शराब माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने भरोसा जताया कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों से प्रदेश में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।



