बिलासपुर संभाग

साइबर ठगी से बचने छात्राओं को पुलिस की खास सलाह, ‘करीबी व्यक्ति को भी मोबाइल न दें’

कोरबा ( शिखर दर्शन ) // डिजिटल दौर में मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें लोगों की निजी तस्वीरों से लेकर बैंकिंग और सोशल मीडिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां तक मौजूद रहती हैं। ऐसे में मोबाइल की थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसी को लेकर कोरबा पुलिस ने कमला नेहरू महाविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक मंजू रात्रे ने छात्राओं को विशेष रूप से सावधान करते हुए कहा कि दोस्ती या रिश्ते की निकटता के बावजूद अपना मोबाइल किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। उन्होंने कहा कि मोबाइल में मौजूद निजी सामग्री का दुरुपयोग होने पर मामला गंभीर रूप ले सकता है।

निजी तस्वीरों को लेकर बरतें सावधानी

मंजू रात्रे ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तस्वीरों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने से बचना चाहिए। यदि सोशल मीडिया पर फोटो डालते हैं तो खाते की गोपनीयता संबंधी सेटिंग का इस्तेमाल करें, ताकि अनजान लोगों तक निजी सामग्री आसानी से न पहुंचे।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर अपराध होने की स्थिति में शर्म या डर के कारण चुप न रहें। किसी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल 1930 पर सूचना देने के साथ पुलिस से संपर्क किया जाए।

अपराध का तरीका बदला, अब घर बैठे निशाना

प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नीरज वर्मा ने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ अपराध का तरीका भी बदल गया है। पहले अपराधी को वारदात के लिए मौके पर पहुंचना पड़ता था, लेकिन अब इंटरनेट के जरिए घर बैठे लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति सचेत करने का प्रयास किया जा रहा है।

नीरज वर्मा ने कहा कि युवाओं में डिजिटल जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन बच्चे और बुजुर्ग कई बार साइबर अपराधियों के डर या दबाव में आ जाते हैं। ऐसे में युवाओं को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सतर्क करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

पुलिस से घबराने की जरूरत नहीं

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर पुलिस से दूरी बनाने के बजाय तुरंत मदद लेनी चाहिए। प्रशिक्षु एसआई मंजू रात्रे ने कहा कि अपराधियों को ताकत तब मिलती है, जब पीड़ित डर के कारण घटना की जानकारी छिपा लेता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध घटना को नजरअंदाज न करें और समय रहते पुलिस को जानकारी दें।

अपर सहायक उपनिरीक्षक टंकेश्वर यादव ने भी विद्यार्थियों के साथ साइबर ठगी से जुड़े अनुभव साझा किए और ऑनलाइन अपराधों के अलग-अलग तरीकों से अवगत कराया।

प्राचार्य बोले- सुविधा के साथ खतरे को भी समझें

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि इंटरनेट और स्मार्टफोन ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है। साइबर अपराधी लोगों की जल्दबाजी, लालच और जानकारी के अभाव का फायदा उठाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अनजान लिंक, संदिग्ध संदेश और किसी भी प्रकार के लालच से बचने की अपील करते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन एक जिम्मेदार और जागरूक डिजिटल उपयोगकर्ता के रूप में।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नीरज वर्मा, आरक्षक आलोक पांडेय, कौशल प्रसाद, महिला आरक्षक अर्चना तिर्की सहित महाविद्यालय के टीपी नरसिम्हम, डॉ. भारती कुलदीप, डॉ. रश्मि शुक्ला और श्रीमती अनीता यादव मौजूद रहे।

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