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14 थाना-चौकी क्षेत्रों में पुलिस ने समझाए ठगी से बचने के तरीके , 2 हजार लोगों तक पहुंची साइबर सुरक्षा की पाठशाला

धमतरी ( शिखर दर्शन ) // साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच धमतरी पुलिस ने जिले में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर करीब 2 हजार छात्र-छात्राओं और नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीके बताए। प्रदेशव्यापी साइबर जागृति अभियान के तहत 14 थाना और चौकी क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज और ग्रामीण इलाकों तक पुलिस की टीमें पहुंचीं और लोगों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के जरूरी उपाय समझाए।

अभियान के दौरान पुलिस ने लोगों को बताया कि साइबर ठग अब केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, संदिग्ध लिंक भेजना, सोशल मीडिया पर नकली प्रोफाइल बनाना, फर्जी केवाईसी अपडेट, इनाम और लॉटरी का लालच, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन खरीदारी के नाम पर ठगी जैसे तरीके लगातार इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

एक गलती और खाली हो सकता है बैंक खाता

जागरूकता कार्यक्रमों में पुलिस ने सबसे ज्यादा जोर लोगों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी की सुरक्षा पर दिया। नागरिकों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड और बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए।

पुलिस ने यह भी समझाया कि बैंक या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति यदि गोपनीय जानकारी या पैसे की मांग करता है तो सतर्क हो जाएं। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर भी सावधानी जरूरी

साइबर जागरूकता अभियान में सोशल मीडिया सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई। पुलिस ने नागरिकों को मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने, संदिग्ध प्रोफाइल से दूरी बनाए रखने तथा निजी फोटो, पहचान संबंधी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने की अपील की गई।

गांवों में यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग की दी जानकारी

धमतरी पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी साइबर जागरूकता को विशेष प्राथमिकता दी। ग्रामीणों को यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी दी गई। पुलिस ने समझाया कि डिजिटल भुगतान सुविधाजनक जरूर है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे केवल स्वयं जागरूक होकर न रुकें, बल्कि कम से कम 5 से 10 अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। इस तरह साइबर जागरूकता को जन-अभियान का रूप दिया जा सकता है।

14 थाना-चौकी क्षेत्रों तक पहुंचा अभियान

धमतरी पुलिस ने जिले के सिटी कोतवाली धमतरी, अर्जुनी, रूद्री, कुरूद, भखारा, मगरलोड, करेगांव, अकलाडोंगरी, नगरी, सिहावा, दुगली और बोराई थाना क्षेत्रों के साथ बिरेझर और करेली बड़ी चौकी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

इन कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों तथा विद्यार्थियों से संवाद कर साइबर अपराध के नए तौर-तरीकों की जानकारी दी।

ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत

पुलिस ने साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों से सबसे महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा कि घटना के बाद चुप न बैठें और न ही देर करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और नजदीकी पुलिस थाने को भी इसकी सूचना दें।

पुलिस के मुताबिक शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को रोकने अथवा उसे वापस प्राप्त करने की कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।

एसपी भावना पांडेय के निर्देशन में चला अभियान

प्रदेश में 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चल रहे साइबर जागृति अभियान के तहत धमतरी में यह अभियान पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय के निर्देशन में चलाया गया। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय और डीसी पटेल के मार्गदर्शन में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

धमतरी पुलिस ने नागरिकों को संदेश दिया कि डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय उतनी ही सतर्कता भी जरूरी है। अनजान कॉल, संदिग्ध संदेश, लिंक और सोशल मीडिया प्रोफाइल से सावधानी बरतना तथा अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

पुलिस ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में तकनीक के साथ-साथ जागरूक और सतर्क नागरिक ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।

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