13 जुलाई महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड तिलक और ड्राईफ्रूट श्रृंगार में भक्तों को दिए बाबा महाकाल ने दिव्य दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सोमवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की भस्म आरती वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। इस अवसर पर बाबा के मस्तक पर दिव्य त्रिपुंड तिलक अर्पित कर ड्राईफ्रूट से मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान समस्त देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का पवित्र जलाभिषेक किया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न कराया गया। भांग, चंदन, सुगंधित द्रव्यों और दिव्य आभूषणों से बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।
भस्म आरती की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटा बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला, पुष्पहार और ड्राईफ्रूट से भगवान का भव्य एवं आकर्षक अलंकरण किया गया। मस्तक पर सुशोभित त्रिपुंड तिलक ने श्रृंगार की दिव्यता को और अधिक अलौकिक बना दिया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। सोमवार की भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं और बाबा महाकाल तक पहुंचाने का निवेदन किया। पूरा महाकाल मंदिर “जय जय श्री महाकाल”, “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।



