मध्यप्रदेश

हाईकोर्ट की अनोखी शर्त: नेत्रहीन बच्चों के साथ एक घंटा बिताने पर ही बहाल होगी रेलवे की याचिका

जबलपुर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की अनूठी मिसाल पेश की है। अदालत ने रेलवे की खारिज हो चुकी याचिका को बहाल करने के लिए एक मानवीय शर्त रखते हुए कहा है कि संबंधित रेलवे अधिकारी और उनके अधिवक्ता नेत्रहीन विद्यालय में बच्चों के साथ एक घंटा बिताने के बाद ही याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।

नेत्रहीन विद्यालय जाकर बिताना होगा समय

हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, संबंधित रेलवे अधिकारी और उनके अधिवक्ता को जबलपुर के अंधमूक बाईपास स्थित नेत्रहीन विद्यालय जाना होगा। वहां उन्हें दृष्टिबाधित बच्चों के साथ कम से कम एक घंटा बिताना होगा। साथ ही बच्चों के लिए 2,500 रुपये का नाश्ता भी लेकर जाना होगा।

याचिका बहाली के दौरान रखी गई शर्त

जानकारी के अनुसार, रेलवे से जुड़े एक मामले में दायर एक विविध (मिसलेनियस) याचिका पहले खारिज हो गई थी। बाद में उसे पुनः बहाल कराने के लिए रेलवे के अधिकारी और उनके अधिवक्ता हाईकोर्ट पहुंचे। इसी दौरान अदालत ने याचिका बहाली के लिए यह विशेष मानवीय शर्त निर्धारित की।

कोर्ट ने बताई शर्त के पीछे की भावना

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दृष्टिबाधित बच्चों के साथ समय बिताने से न केवल अधिकारियों और अधिवक्ताओं को आत्मिक संतोष मिलेगा, बल्कि बच्चों के मन में भी समाज और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होगा। अदालत ने संकेत दिया कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक दायित्व भी महत्वपूर्ण हैं।

हाईकोर्ट के इस आदेश की व्यापक चर्चा हो रही है। इसे न्यायपालिका के संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण माना जा रहा है। रेलवे के संबंधित अधिकारी और अधिवक्ता द्वारा अदालत की शर्त पूरी किए जाने के बाद ही याचिका की बहाली पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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