रायपुर संभाग

बारनवापारा अभयारण्य में तीन चीतलों की मौत, एक की मौत पर शिकार की आशंका; जांच में जुटा वन विभाग

पिथौरा ( शिखर दर्शन ) // बारनवापारा अभयारण्य में तीन चीतलों की मौत का मामला सामने आया है। वन विभाग के अनुसार, इनमें दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है, जबकि एक चीतल की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। विभाग को आशंका है कि उसकी मौत शिकार या किसी जंगली अथवा आवारा जानवर के हमले से हुई हो सकती है। मामले की जांच जारी है।

रामपुर चारागाह में मिले तीन चीतलों के शव

जानकारी के अनुसार, अभयारण्य के विस्थापित ग्राम रामपुर के समीप स्थित रामपुर चारागाह के कक्ष क्रमांक-127 में सोमवार और मंगलवार के दौरान तीन चीतल मृत अवस्था में मिले। एक चीतल की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि उसकी मौत शिकार के कारण हुई या किसी जंगली अथवा आवारा कुत्तों के हमले से।

दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष में

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष के दौरान हुई। घटनास्थल पर एक चीतल का सींग अलग मिला, जबकि दूसरे चीतल की गर्दन में सींग फंसा हुआ था। माना जा रहा है कि संघर्ष के दौरान दोनों के सींग आपस में उलझ गए, जिससे उनकी गर्दन में गंभीर चोट लगी और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण दोनों की मौत हो गई। दोनों चीतलों की गर्दन की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। घटनास्थल पर काफी मात्रा में खून के निशान मिले हैं।

पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम निस्तारण

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों चीतलों का नियमानुसार दाह संस्कार कर दिया गया। विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तीसरे चीतल की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।

रामपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में हैं चीतल

बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक कृष्णानु चंद्राकर ने तीन चीतलों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि रामपुर क्षेत्र के आसपास लगभग तीन हजार चीतल विचरण करते हैं। उन्होंने कहा कि दो चीतलों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है, जबकि तीसरे मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।

काले हिरणों की सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता

घटनास्थल के समीप ही काले हिरणों का भी प्राकृतिक रहवास है। यदि तीसरे चीतल की मौत आवारा कुत्तों के हमले से हुई है, तो यह वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में भविष्य में काले हिरणों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता है। वन विभाग ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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