राम नाम अंकित बिल्व पत्रों से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप

भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक, रजत आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से हुआ अलौकिक श्रृंगार
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान महाकाल का ‘राम’ नाम अंकित बिल्व पत्रों, रजत आभूषणों, भांग, चंदन, रुद्राक्ष और सुगंधित पुष्पों से भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पुण्य लाभ अर्जित किया।
पंचामृत अभिषेक के बाद सजा अलौकिक स्वरूप
प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक तथा दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के उपरांत भांग, चंदन, रजत आभूषणों, रुद्राक्ष की मालाओं और राम नाम अंकित बिल्व पत्रों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई भस्म आरती
परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और ध्यान के बाद कपूर आरती हुई तथा ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष और पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया।
महाकाल के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए तथा नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर आशीर्वाद मांगा। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा।



