22 जून महाकाल भस्म आरती : त्रिपुंड-त्रिनेत्र स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भक्ति और आस्था से गूंजा महाकाल मंदिर

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर सोमवार तड़के भगवान महाकालेश्वर की प्रातःकालीन भस्म आरती श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। अलसुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में दिव्य आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया। विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल त्रिपुंड और त्रिनेत्र स्वरूप में भक्तों को दर्शन देकर मन मोहते नजर आए।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित समस्त देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। फिर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान का भांग, चंदन और दिव्य आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया।
वैदिक मंत्रों के बीच हुई भस्म आरती
भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और स्तुति के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं एवं सुगंधित पुष्पों से अलंकृत किया गया।
निराकार से साकार दर्शन की मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी दिव्य क्षण के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचते हैं और स्वयं को धन्य मानते हैं।
नंदी महाराज के समक्ष मांगी मनोकामनाएं
भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर सुख, समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद मांगा। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आज के श्रृंगार की विशेषता
- त्रिपुंड और त्रिनेत्र स्वरूप में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार
- रजत शेषनाग मुकुट और मुंडमाला से अलंकरण
- रुद्राक्ष एवं पुष्प मालाओं से विशेष सज्जा
- वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई भस्म आरती
- देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की यह दिव्य परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। जय श्री महाकाल।


