सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, टनल में उतरकर CM मोहन और खट्टर ने किया निरीक्षण

920 करोड़ की कान्ह डायवर्शन परियोजना का जायजा, 12 किमी लंबी टनल का 8.15 किमी काम पूरा
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत पवित्र शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को देश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में शामिल ‘कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट’ का स्थल निरीक्षण किया। दोनों नेता निर्माणाधीन टनल के भीतर पहुंचे और परियोजना की प्रगति का जायजा लिया।
टनल के भीतर पहुंचकर देखा निर्माण कार्य
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर चिंतामन-जवासिया क्षेत्र स्थित शाफ्ट नंबर-2 के माध्यम से निर्माणाधीन टनल के अंदर पहुंचे। यहां अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने परियोजना की तकनीकी विशेषताओं और प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।

दोनों नेताओं ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
शिप्रा में गंदा पानी जाने से रोकेगी परियोजना
करीब 920 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शिप्रा नदी में मिलने से रोकना है।
परियोजना के तहत—
- ग्राम जमालपुरा में बैराज का निर्माण किया जा रहा है।
- दूषित जल को क्लोज डक्ट और टनल सिस्टम के माध्यम से मोड़ा जाएगा।
- गंदे पानी को गंभीर बांध के डाउनस्ट्रीम तक पहुंचाया जाएगा।
- शिप्रा नदी में प्रदूषित जल का प्रवाह पूरी तरह रोका जाएगा।
30 किलोमीटर से अधिक लंबी है परियोजना

अधिकारियों के अनुसार परियोजना की कुल लंबाई 30.15 किलोमीटर है, जिसमें—
- 18.15 किलोमीटर कट एंड कवर डक्ट
- 12 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनल
का निर्माण शामिल है।
अब तक 12 किलोमीटर लंबी टनल में से 8.15 किलोमीटर खुदाई का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष हिस्से पर तेजी से काम जारी है।
सिंहस्थ और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ डिजाइन
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को उज्जैन की भविष्य की आबादी और सिंहस्थ महापर्व के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद—
- शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों पर स्वच्छ जल उपलब्ध रहेगा।
- श्रद्धालुओं को स्नान और आचमन के लिए प्रदूषण मुक्त जल मिलेगा।
- सिंहस्थ-2028 के दौरान स्वच्छता व्यवस्था और बेहतर होगी।
- नदी संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
समीक्षा बैठक में दिए आवश्यक निर्देश
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। बैठक में परियोजना की प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर चर्चा की गई।
दोनों नेताओं ने परियोजना को तय समय में पूरा करने पर जोर देते हुए कहा कि सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।




