तेज धमाके के साथ 100 मीटर सड़क जमीन में समाई, कोयलांचल में दहशत

धनबाद के मुगमा क्षेत्र में सड़क धंसने से 30 गांवों का संपर्क टूटा, अवैध खनन और ब्लास्टिंग पर उठे सवाल
धनबाद ( शिखर दर्शन ) // झारखंड की कोयलांचल राजधानी धनबाद में गुरुवार को प्रकृति और खनन गतिविधियों का खौफनाक असर देखने को मिला। निरसा स्थित ईसीएल मुगमा क्षेत्र के चापापुर ओसीपी के पास अचानक तेज धमाके के साथ करीब 100 मीटर लंबी सड़क 10 से 12 फीट नीचे जमीन में धंस गई। सड़क के अचानक धंसने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय सड़क पर कोई वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
30 गांवों का जिला और ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क टूटा

सड़क धंसने के कारण आसपास के लगभग 30 गांवों का जिला मुख्यालय और प्रखंड मुख्यालय से सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। ग्रामीणों को अब आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं। कई गांवों में दैनिक जरूरतों और आपातकालीन सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रातभर दहशत में रहे ग्रामीण
घटना के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि तेज धमाके के बाद अचानक जमीन धंसने से लोग सहम गए। कई परिवारों ने रातभर जागकर गुजारी। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो आसपास के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
अवैध उत्खनन और ब्लास्टिंग को बताया कारण
स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क धंसने के लिए क्षेत्र में जारी अवैध उत्खनन और भारी ब्लास्टिंग को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि कोलियरियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए लगातार विस्फोट किए जा रहे हैं, जिससे जमीन अंदर से कमजोर हो रही है।
- खनन क्षेत्र में लगातार ब्लास्टिंग की शिकायत
- सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल
- अवैध उत्खनन की जांच की मांग
- प्रभावित क्षेत्रों का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग
जनप्रतिनिधियों ने कंपनी पर साधा निशाना
घटना की जानकारी मिलते ही जिला परिषद सदस्य पिंकी मरांडी और समाजसेवी अंजलि पासवान मौके पर पहुंचीं। उन्होंने सड़क धंसने की घटना के लिए ओसीपी का संचालन कर रही रेड्डी कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।
पिंकी मरांडी ने कहा कि कंपनी की लापरवाही के कारण लोगों की जान-माल खतरे में पड़ गई है। उन्होंने सड़क की तत्काल मरम्मत और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ग्रामीणों का कहना है कि मुगमा क्षेत्र में जमीन धंसने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान निकाला और न ही प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए गए।
पुनर्वास की मांग फिर हुई तेज
झामुमो जिला अध्यक्ष लखी सोरेन ने कहा कि सड़क धंसने के कारण कई गांव टापू जैसे बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से विस्थापन झेल रहे कई परिवार अब भी पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि प्रभावित ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक सड़क मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्वास की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए।
जांच और सुरक्षा उपायों की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन, ईसीएल प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों से सड़क धंसने के कारणों की विस्तृत जांच कराने, प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।



