MPPSC मुख्य परीक्षा 2025 पर हाईकोर्ट की मुहर, तीन महीने बाद हटा स्टे; हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

प्रीलिम्स परिणाम विवाद के बीच रुकी थी प्रक्रिया, 17 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई
जबलपुर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की मुख्य परीक्षा 2025 का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने करीब तीन महीने से लगी रोक को हटाते हुए मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। न्यायालय के इस फैसले से प्रदेशभर के हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से परीक्षा कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।
प्रीलिम्स परिणाम को चुनौती देने पहुंचा था मामला कोर्ट
मुख्य परीक्षा पर रोक लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के परिणामों को लेकर दायर याचिकाओं के बाद लगी थी। याचिकाकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
- कैटेगरीवार कटऑफ जारी नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए।
- आरक्षित वर्ग के मेरिटधारी अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की सीटों पर समायोजित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
- आयु सीमा एवं अन्य छूट प्राप्त अभ्यर्थियों के अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन संबंधी नियमों को चुनौती दी गई।
शासन के जवाब से असंतुष्ट था न्यायालय
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शासन की ओर से प्रस्तुत जानकारी स्पष्ट और संतोषजनक नहीं है। न्यायालय ने इस पर नाराजगी जताते हुए 25 मार्च 2025 को मुख्य परीक्षा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी और अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था।
अभ्यर्थियों के हित को देखते हुए हटाई गई रोक
गुरुवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया। सुनवाई के दौरान यह पक्ष भी सामने आया कि लंबे समय तक परीक्षा स्थगित रहने से हजारों अभ्यर्थियों के करियर और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य परीक्षा पर लगा स्टे हटाते हुए परीक्षा आयोजन का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं
हालांकि न्यायालय ने परीक्षा कराने की अनुमति दे दी है, लेकिन मूल याचिकाओं पर सुनवाई अभी जारी रहेगी। कोर्ट मामले से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा करेगा।
मामले की अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है, जहां याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर आगे की बहस होगी।



