भोपाल में बड़े आयोजनों पर सख्ती की तैयारी, 100 से ज्यादा मेहमान बुलाने पर लेनी पड़ सकती है निगम की अनुमति

कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम का नया प्रस्ताव; घरों में चार डस्टबिन अनिवार्य, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने की तैयारी
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // राजधानी भोपाल में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़े आयोजनों में कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करना, स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण बढ़ाना और डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करना शामिल है। नगर निगम ने इन प्रस्तावों को मंजूरी के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेज दिया है।
100 से अधिक मेहमानों वाले आयोजनों पर रहेगी निगरानी
प्रस्तावित नियमों के अनुसार जन्मदिन, धार्मिक, सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में यदि 100 से अधिक लोग शामिल होते हैं, तो आयोजन से कम से कम तीन दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और निपटान की जिम्मेदारी भी आयोजकों को ही उठानी होगी।
कचरा अलग नहीं किया तो लगेगा भारी जुर्माना
नगर निगम ने कचरा पृथक्करण को लेकर भी सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप गीले और सूखे कचरे सहित अन्य अपशिष्टों को अलग-अलग नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों, कॉलोनियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और परिसरों पर डेढ़ सौ गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
घरों में चार डस्टबिन रखने होंगे
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक घर में चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य किया जा सकता है। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी वेस्ट और घरेलू ई-वेस्ट के लिए अलग-अलग डस्टबिन शामिल होंगे। नगर निगम इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से करेगा, जिससे कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा सके।
स्रोत स्तर पर ही निपटान का लक्ष्य
नगर निगम का लक्ष्य शहर में उत्पन्न होने वाले कम से कम 50 प्रतिशत कचरे का निपटान घरों और स्रोत स्तर पर ही सुनिश्चित करना है। निगम के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से 104 करोड़ रुपये की संभावित आय का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अब तक 38 करोड़ 43 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
नगर निगम का मानना है कि प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद शहर में स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा और राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में भी भोपाल की स्थिति और मजबूत हो सकेगी।



