मध्यप्रदेश

कॉपी जांच पर उठे सवालों के बाद हरकत में आया बोर्ड, 12वीं छात्रा की उत्तरपुस्तिका की होगी दोबारा जांच

सही जवाबों पर कटे नंबर के आरोप ने बढ़ाई माशिमं की चिंता, मीडिया में मामला आने के बाद पुनर्मूल्यांकन को तैयार हुआ बोर्ड

भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 12वीं बोर्ड परीक्षा की छात्रा पूर्वा शर्मा द्वारा उत्तरपुस्तिका के गलत मूल्यांकन का आरोप लगाए जाने के बाद अब बोर्ड प्रशासन हरकत में आ गया है। छात्रा का दावा है कि उसने राजनीति शास्त्र, हिंदी और इतिहास विषय में एनसीईआरटी आधारित सही उत्तर लिखे थे, बावजूद इसके उसे अपेक्षा से बेहद कम अंक दिए गए। मामला सामने आने और मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद भोपाल बोर्ड ने उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच कराने की बात कही है।

पीड़ित छात्रा पूर्वा शर्मा

छात्रा पूर्वा शर्मा ने आरोप लगाया कि उसकी उत्तरपुस्तिका में कई ऐसे प्रश्न थे जिनके उत्तर पूरी तरह सही होने के बावजूद मूल्यांकन के दौरान अंक काट दिए गए। इससे न केवल उसकी मेरिट प्रभावित हुई बल्कि बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो गए। छात्रा और उसके परिजनों का कहना है कि यदि कॉपियों की जांच में ऐसी लापरवाही हो रही है, तो इससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

मामले ने तूल पकड़ा तो भोपाल बोर्ड प्रशासन ने सफाई देते हुए छात्रा को गोपनीय शाखा में उत्तरपुस्तिका जमा कराने के लिए कहा है। भोपाल बोर्ड के सीएसओ भूपेश गुप्ता ने कहा कि यदि किसी छात्र को मूल्यांकन में त्रुटि की आशंका है, तो वह नियमानुसार आवेदन कर सकता है। उन्होंने बताया कि छात्रा पूर्वा शर्मा शुक्रवार को गोपनीय शाखा में अपनी उत्तरपुस्तिका प्रस्तुत कर सकती है, जिसके बाद वैधानिक प्रक्रिया के तहत पुनः परीक्षण किया जाएगा।

हालांकि बोर्ड प्रशासन ने यह मानने से इनकार किया कि जानबूझकर कम अंक दिए गए हैं, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि यदि मूल्यांकन में कोई प्रश्न छूट गया हो या तकनीकी त्रुटि हुई हो, तो नियमानुसार सुधार संभव है। इसी के साथ छात्र-छात्राओं को पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना की प्रक्रिया अपनाने की सलाह भी दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड स्तर पर कॉपियों की जांच में अधिक जवाबदेही और मॉनिटरिंग की जरूरत है, ताकि किसी छात्र के भविष्य पर लापरवाही का असर न पड़े।

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