अन्तर्राष्ट्रीय

‘आंसुओं का द्वार’ बन सकता है बाब अल-मंदेब: ईरान की धमकी से वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहा बड़ा संकट

होर्मुज के बाद अब दूसरे अहम समुद्री मार्ग पर खतरा, तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गहरा असर संभव

रायपुर / नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अब एक और रणनीतिक समुद्री मार्ग ‘बाब अल-मंदेब स्ट्रेट’ को लेकर खतरा बढ़ गया है। पहले से ही ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर बनी अस्थिरता के बीच ईरान द्वारा इस जलसंधि को भी बंद करने की धमकी ने वैश्विक व्यापार, खासकर तेल आपूर्ति और सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 10-12% और कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के साथ उसका बड़ा व्यापार इसी रूट के जरिए होता है।

ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस जलसंधि को बाधित करने के संकेत दिए हैं। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है और कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इससे महंगाई बढ़ेगी, उद्योगों की लागत में इजाफा होगा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडराने लगेगा।

बाब अल-मंदेब से जुड़ी अहम बातें:

  • यह लाल सागर का प्रवेश द्वार है, जहां से स्वेज नहर तक पहुंचा जाता है
  • लगभग 100 किमी लंबा और 29-30 किमी चौड़ा रणनीतिक मार्ग
  • रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही
  • वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा इसी रूट पर निर्भर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के साथ-साथ ‘बाब अल-मंदेब’ भी बाधित होता है, तो दुनिया के करीब 30% तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप होने की स्थिति बन सकती है।

इतिहास में भी यह जलमार्ग कई बार प्रभावित हो चुका है—1973 के अरब-इजरायल युद्ध से लेकर हाल के वर्षों में यमन संघर्ष और समुद्री डकैती जैसी घटनाओं के कारण। मौजूदा हालात में यह आशंका और गहरा गई है कि यह जलसंधि एक बार फिर वैश्विक संकट का केंद्र बन सकती है।

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