हिंदी-मराठी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: CJI गवई ने वकील को लगाई फटकार, याचिका खारिज

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी भाषा विवाद के दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा कथित हमलों के मामलों में FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई की अगुवाई वाली पीठ ने मुंबई के अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय को न केवल याचिका खारिज कर वापस जाने को कहा, बल्कि उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई।
CJI गवई ने सुनवाई के दौरान उपाध्याय से कहा, “पहले बॉम्बे हाईकोर्ट जाइए। यह ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ नहीं, बल्कि ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ है।” उन्होंने सख्त लहजे में यह भी जोड़ा, “हमने बार-बार कहा है कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इस तरह के दुस्साहस पर हम नाराज हैं।”
पुराने दिनों का जिक्र, चेतावनी का इशारा
सुनवाई के दौरान CJI गवई ने उपाध्याय को पुराने दिनों की याद दिलाते हुए कहा, “मैंने आपको दोषी पाकर एक बार बचाया है। अवमानना का नोटिस जारी नहीं करना चाहता। इशारे मत कीजिए, मुझे बॉम्बे के दिनों की याद मत दिलाइए… याद कीजिए उस समय आपको किसने बचाया था।” यह इशारा उस घटना की ओर था जब जस्टिस गवई बॉम्बे हाईकोर्ट में थे और उपाध्याय को कोर्ट की अवमानना का नोटिस देने की नौबत आ गई थी, लेकिन एक अन्य वकील के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ था।
याचिका वापस ली, हाईकोर्ट जाने का निर्देश
चेतावनी के बाद उपाध्याय ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया, “कल ही फ्लाइट भरकर वहां जाकर मामला दर्ज कराइए।” अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले संबंधित हाईकोर्ट से ही राहत लेनी चाहिए।
