तारबाहर अंडरब्रिज 10 दिन के लिए बंद , रेलवे की लापरवाही से आमजन बेहाल — सबसे व्यस्ततम मार्ग पर अचानक रोक, शहर को होगी भारी परेशानी
ब्रिज के अंदर मवेशी ना जा सके इसके लिए लगाया जाएगा काऊकेचर
बिलासपुर (शिखर दर्शन) // बिलासपुर यार्ड में स्थित तारबहर अंडरब्रिज (LHS-366) को रेलवे विभाग द्वारा 15 जुलाई 2025 (सोमवार) से 25 जुलाई 2025 (शुक्रवार) तक यानि पूरे 11 दिन के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। रेलवे द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय बारिश के चलते अंडरब्रिज में मवेशियों के जमावड़े और जाम की स्थिति को देखते हुए रेलवे द्वारा ब्रिज के दिनों ओर काऊ केचर लगाने का काम किया जाएगा । हालांकि, यह फैसला आमजन की परेशानियों को नजरअंदाज करते हुए अचानक और बिना पूर्व सूचना के लिया गया है, जिससे इस क्षेत्र में यातायात का बुरा हाल होना तय है।

यह उल्लेखनीय है कि तारबहर अंडरब्रिज शहर का सबसे व्यस्ततम अंडरब्रिज है, जहाँ से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए, 10 दिन के लिए इसे बंद करना सीधे तौर पर आम जनता की सुविधाओं पर कुठाराघात है। जबकि ब्रिज पर काऊ केचर लगाने का काम आवागमन चालू रख कर भी किया जा सकता था बस इसके लिए थोड़ा ट्रैफिक डायवर्ड करना पड़ता । अब क्षेत्रवासियों को कार्यालय, स्कूल, अस्पताल और व्यापारिक आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
रेलवे विभाग की इस कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी कई बार शिखर दर्शन न्यूज ने इस मुद्दे को उठाया है। चाहे मवेशियों का अंडरब्रिज में जमावड़ा हो या भारी वाहनों की क्षमता से अधिक आवाजाही — हर बार रिपोर्टिंग की गई, चेतावनी दी गई, लेकिन रेलवे अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। विभाग की इसी घोर लापरवाही का नतीजा है कि अब अचानक ब्रिज को सील करने की नौबत आ गई।
सिर्फ इतना ही नहीं, यह अंडरब्रिज वास्तविक मापदंडों से भी भटका हुआ है। इसमें सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। भारी वाहन लगातार अंडरब्रिज से गुजरते हैं, जबकि इसकी संरचना इतनी मजबूत नहीं है कि वह इस दबाव को झेल सके। रेलवे को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन अधिकारी या तो अनजान बने हुए हैं या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
उक्त अंडरब्रिज रेलवे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर ट्रैफिक कंट्रोल तक की जिम्मेदारी रेलवे की बनती है। बावजूद इसके ब्रिज के भीतर की समस्याओं को लेकर अधिकारी हमेशा उदासीन नजर आते हैं। गड्ढे, कीचड़, अंधेरा और मवेशियों की भरमार ने इसे जानलेवा बना दिया है।
अब जब रेलवे खुद इसे 10 दिनों के लिए बंद कर रहा है, तो सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक अधिकारी लापरवाही और चुप्पी की चादर ओढ़े बैठे रहेंगे? क्या किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतजार किया जा रहा है?
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता पर लें। अन्यथा यह असुविधा आने वाले दिनों में जनाक्रोश का रूप भी ले सकती है।



