टोल टैक्स में बड़ा बदलाव: फ्लाईओवर, ब्रिज और टनल वाले हाइवे पर अब लगेगा आधा टोल, यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों को राहत
नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // मोदी सरकार ने आम जनता और ट्रांसपोर्ट कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए टोल टैक्स प्रणाली में अहम बदलाव किया है। 2 जुलाई 2025 से लागू हुए नए नियम के तहत अब उन नेशनल हाईवे सेक्शनों पर टोल टैक्स में 50% तक की कटौती की गई है, जहां फ्लाईओवर, टनल, ब्रिज या एलिवेटेड स्ट्रक्चर बने हैं। यह बदलाव खास तौर पर लॉजिस्टिक्स सेक्टर और रोजाना हाइवे से सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
पहले क्यों महंगा था टोल?
अब तक, यदि किसी हाईवे सेक्शन पर टनल, ब्रिज या फ्लाईओवर जैसी संरचनाएं थीं, तो वहां टोल टैक्स की गणना उनके निर्माण की उच्च लागत को ध्यान में रखते हुए होती थी। पुराने नियमों के अनुसार, ढांचे की लंबाई को 10 गुना तक कर टोल वसूला जाता था, जिससे यात्रियों को भारी-भरकम टोल चुकाना पड़ता था।
अब क्या बदला है?
नई व्यवस्था में टोल टैक्स की गणना के लिए दो तरीके अपनाए जाएंगे—
- ढांचे की लंबाई × 10
- पूरे हाईवे सेक्शन की लंबाई × 5
इनमें जो कम होगा, उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि यात्रियों को अब टोल केवल हाईवे की आधी लंबाई पर देना होगा, जिससे शुल्क में लगभग 50% तक की कटौती हो जाएगी।
कहां-कहां लागू होगा नया नियम?
यह नई व्यवस्था केवल उन्हीं हाइवे सेक्शनों पर लागू होगी जहां ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर जैसे स्ट्रक्चर पूरे सेक्शन की लंबाई का 50% या उससे अधिक हिस्सा घेरे हुए हैं। आम सड़कों और सामान्य हाईवे पर टोल की पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
किसे होगा फायदा?
- रोजाना यात्रा करने वाले यात्री – दैनिक सफर में सीधी बचत होगी।
- ट्रांसपोर्ट कंपनियां – माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी।
- बस और ट्रक ऑपरेटर – लंबी दूरी की यात्रा अब सस्ती पड़ेगी।
- निजी वाहन चालक – आम यात्रियों का सफर अब ज्यादा किफायती बनेगा।
सरकार की मंशा क्या है?
इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य टोल प्रणाली को पारदर्शी, व्यावहारिक और यात्री हितैषी बनाना है। साथ ही लॉजिस्टिक क्षेत्र को बढ़ावा देना और देश की यातायात व्यवस्था को स्मार्ट और सुलभ बनाना भी इस बदलाव का अहम उद्देश्य है।
निष्कर्ष:
यह फैसला न केवल जनता की जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि लॉजिस्टिक सेक्टर को भी नई रफ्तार देगा। सरकार की यह पहल सुगम यात्रा और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
