रायपुर संभाग

सहायक शिक्षकों की नियुक्ति आदेश रद्द: समायोजन की संभावना तलाशने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी

रायपुर (शिखर दर्शन) // सहायक शिक्षकों की नियुक्ति आदेश रद्द होने के विवाद के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। बीएड अर्हताधारी सहायक शिक्षकों के समायोजन और उनके लिए अन्य संभावनाओं पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। इस पहल से सरकार ने इस संवेदनशील मामले का समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
30 दिसंबर को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में राज्य सरकार ने सहायक शिक्षकों के 2,855 पदों पर नियुक्त बीएड धारकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया। लोक शिक्षण संचालनालय ने बस्तर और सरगुजा संभाग के सहायक शिक्षकों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब डीएड धारियों की चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।

भाजपा कार्यालय में प्रदर्शन
इस फैसले से प्रभावित सहायक शिक्षकों ने रायपुर स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। बर्खास्त शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए अपनी गिरफ्तारी भी दी। इन शिक्षकों का कहना है कि सरकार को उनके भविष्य के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

सरकार की पैरवी और आगे की योजना

  • 2023 में बीएड अर्हता के आधार पर सीधी भर्ती में चयनित सहायक शिक्षकों की नियुक्ति को 2 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने अमान्य घोषित कर दिया। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में डीएड धारकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
  • हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
  • राज्य सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की है, जो अभी लंबित है।
  • meanwhile, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में डीएड धारकों की संभावित चयन सूची भी तैयार की गई है।

उपमुख्यमंत्री का बयान
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। सभी विकल्पों पर विचार कर शिक्षकों के हित में उचित कदम उठाए जाएंगे।

सरकार की मंशा स्पष्ट
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित होने वाली कमेटी बीएड धारकों के समायोजन और उनके भविष्य के लिए संभावनाएं तलाशेगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि प्रभावित सहायक शिक्षकों को न्याय मिले और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

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