भिलाई स्टील प्लांट में गैस रिसाव की स्थिति बनाकर हुआ मॉक ड्रिल, 12 श्रमिकों के बचाव का किया गया अभ्यास

दुर्ग ( शिखर दर्शन ) // भिलाई इस्पात संयंत्र में किसी भी संभावित औद्योगिक आपदा से निपटने की तैयारियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखने के लिए 20 अगस्त को संयुक्त आपातकालीन मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान एसएमएस-3 एलडी गैस होल्डर में अत्यधिक बारिश और बाढ़ के कारण विद्युत नियंत्रण प्रणाली में खराबी आने तथा सुरक्षा इंटरलॉक निष्क्रिय होने से गैस रिसाव की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। अभ्यास के तहत 12 श्रमिकों के गैस के संपर्क में आने से अचेत होने का परिदृश्य बनाया गया।
मॉक ड्रिल में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), अग्निशमन सेवाओं तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों की टीमें शामिल हुईं। अभ्यास का उद्देश्य आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, बचाव कार्य और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय की प्रभावशीलता को परखना था।
आपात स्थिति घोषित होते ही शुरू हुआ बचाव अभियान
अभ्यास के निर्धारित परिदृश्य के अनुसार गैस रिसाव की सूचना मिलने के बाद सहायक महाप्रबंधक (ईएमडी) रवि कुमार सोनी ने आपात स्थिति घोषित की। प्रभावित क्षेत्र को खाली कराने और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद महाप्रबंधक (ईएमडी) अजय गजघाटे ने मुख्य महाप्रबंधक (ईएमडी) पी.वी.वी.एस. मूर्ति और इंसिडेंट कंट्रोलर को सूचना दी।
मुख्य महाप्रबंधक पी.वी.वी.एस. मूर्ति घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद एडीएम दुर्ग एवं चीफ इंसिडेंट कंट्रोलर वीरेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे और सहभागी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए पूरी आपातकालीन प्रतिक्रिया की निगरानी की।
एससीबीए पहनकर प्रभावित क्षेत्र में पहुंचीं बचाव टीमें
मॉक ड्रिल के दौरान प्रभावित क्षेत्र को तत्काल सील किया गया और अनावश्यक कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भिलाई इस्पात संयंत्र के अग्निशमन दल ने सेल्फ कंटेन्ड ब्रीदिंग अपरेटस (एससीबीए) पहनकर निर्धारित प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश किया।
अभ्यास के तहत अचेत बताए गए 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचाया गया। प्लांट कंट्रोल, मुख्य चिकित्सा पोस्ट, गैस सुरक्षा विभाग, सीआईएसएफ, पर्यावरण प्रबंधन, सिविल डिफेंस और मानव संसाधन विभाग सहित अन्य इकाइयों ने भी अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
गैस रिसाव पर नियंत्रण और क्षेत्र की सुरक्षा जांच का किया गया अभ्यास
मॉक ड्रिल के अगले चरण में ईएमडी के गैस सेफ्टी सेक्शन ने काल्पनिक गैस रिसाव को नियंत्रित करने की कार्रवाई की। बचाव अभियान पूरा होने के बाद पोर्टेबल गैस डिटेक्टर और गैस एनालाइजर से प्रभावित क्षेत्र की जांच की गई।
अभ्यास के तहत ऑक्सीजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर निर्धारित अनुमेय सीमा में पाए जाने के बाद क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया गया और सामान्य परिचालन बहाल करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर परखी आपदा प्रबंधन की तैयारियां
मॉक ड्रिल के दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र, जिला प्रशासन और विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अधिकारियों ने बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के इस्तेमाल और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का आकलन किया।
अधिकारियों ने आपातकालीन तैयारियों को और मजबूत करने तथा संभावित औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए।
मॉक ड्रिल के बाद हुई समीक्षा बैठक
अभ्यास के सफल समापन के बाद मानव संसाधन विकास विभाग में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। एडीएम दुर्ग वीरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मॉक ड्रिल में शामिल विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों और पर्यवेक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए।
बैठक में अभ्यास के दौरान अपनाई गई बेहतर कार्यप्रणालियों के साथ-साथ आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने वाले सुधार के बिंदुओं पर चर्चा की गई।
एडीएम वीरेंद्र सिंह ने मॉक ड्रिल में शामिल सभी संगठनों के सामूहिक प्रयास, तत्परता और कार्यकुशलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए ऐसी तैयारियों का लगातार अभ्यास जरूरी है।



