पंचामृत अभिषेक के बाद भस्म अर्पित कर हुआ विशेष श्रृंगार, शेषनाग मुकुट और रजत मुण्डमाल से सजे भगवान महाकाल
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 29 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल का मनोहारी और दिव्य श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल को भांग और चंदन अर्पित करने के साथ विभिन्न आभूषणों से दिव्य स्वरूप में सजाया गया।
भस्म अर्पण के बाद दिव्य स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान और पूजन किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आकर्षक आभूषणों से बाबा का मनोहारी श्रृंगार किया गया।
जयकारों से गूंज उठा महाकाल मंदिर
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामना कही और बाबा से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर लगातार “जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंजता रहा।




