31 अगस्त को त्रिपुण्ड, बिल्व पत्र और चंद्र श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिखा दिव्य स्वरूप

भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में भक्तों को दिए दर्शन, जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष पूजन और दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का त्रिपुण्ड, बिल्व पत्र, चंद्र एवं विभिन्न आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूजन के बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन, पुष्प और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया और कपूर आरती संपन्न हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और विभिन्न आभूषणों से बाबा का मनोहारी अलंकरण किया गया।
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामना कहकर उसके पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान श्रद्धालु लगातार बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।



