फ्रांस में ब्लड बैंक के फ्रीजर हैक, तापमान 110 डिग्री तक बढ़ाने की कोशिश; अलर्ट से टला बड़ा खतरा

तीन केंद्रों के कोल्ड स्टोरेज सिस्टम में सेंध, माइनस 30 डिग्री पर रखे प्लाज्मा को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया; किसी रक्त उत्पाद को नुकसान नहीं
पेरिस ( एजेंसी ) // फ्रांस में साइबर अपराधियों ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी संवेदनशील व्यवस्था को निशाना बनाकर गंभीर खतरा पैदा करने की कोशिश की। हैकर्स ने फ्रांस की सरकारी रक्त सेवा के तीन केंद्रों में इस्तेमाल होने वाले कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की तापमान नियंत्रण व्यवस्था में सेंध लगाई और फ्रीजर की सेटिंग बेहद ऊंचे तापमान पर पहुंचाने का प्रयास किया। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, माइनस 30 डिग्री सेल्सियस पर रखे जाने वाले प्लाज्मा फ्रीजर की तापमान सेटिंग 110 डिग्री सेल्सियस तक करने की कोशिश हुई। हालांकि, निगरानी और अलार्म सिस्टम ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली और कर्मचारियों ने प्लाज्मा को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। इस घटना में किसी भी रक्त उत्पाद को नुकसान नहीं हुआ। Reuters+2
ब्लड बैंक नहीं, उसके उपकरण प्रदाता के सिस्टम पर हमला
फ्रांस की रक्त सेवा फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट (EFS) ने स्पष्ट किया कि संस्था को सीधे निशाना नहीं बनाया गया था। साइबर हमला उसके रेफ्रिजरेशन उपकरण उपलब्ध कराने वाले सेवा प्रदाता की निगरानी और नियंत्रण प्रणाली से जुड़ा था। इसी के जरिए तीन क्षेत्रीय केंद्रों के कोल्ड स्टोरेज सिस्टम के संचालन संबंधी मानकों में बदलाव किया गया।
यह घटना 2 नवंबर को सामने आई। EFS के अनुसार, तापमान और डीफ्रॉस्टिंग से संबंधित सेटिंग में असामान्य बदलाव किए गए थे। अलार्म सिस्टम ने खतरे का संकेत दिया, जिसके बाद कर्मचारियों ने प्रभावित उपकरणों को नियंत्रित किया और एहतियात के तौर पर वहां रखा प्लाज्मा दूसरी सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर दिया। OCCRP+2
110 डिग्री का आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट पर आधारित
फ्रांस के साप्ताहिक अखबार ले कनार आंशेने ने सबसे पहले इस साइबर हमले की खबर प्रकाशित की थी। अखबार के मुताबिक, हैकर्स ने फ्रीजर की तापमान सेटिंग माइनस 30 से बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस करने की कोशिश की थी। हालांकि, EFS ने तापमान में बदलाव की पुष्टि तो की, लेकिन 110 डिग्री के सटीक आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 110 डिग्री का आंकड़ा नियंत्रण प्रणाली में की गई कथित सेटिंग से जुड़ा है, न कि इस बात से कि फ्रीजर के भीतर वास्तव में इतना तापमान पहुंच गया था। The Washington Post+2
मरीजों और रक्त आपूर्ति पर असर नहीं
प्रभावित कोल्ड स्टोरेज में रक्त चढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लाज्मा के पैकेट और दवाओं के निर्माण में काम आने वाले प्लाज्मा के नमूने रखे गए थे। EFS ने बताया कि किसी भी रक्त उत्पाद या नमूने को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई उत्पाद नष्ट हुआ। रक्त संग्रह तथा अस्पतालों तक उसकी आपूर्ति भी बाधित नहीं हुई।
फ्रांस की EFS देशभर के 1,900 से अधिक अस्पतालों के लिए रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स एकत्र करने, उनकी जांच और प्रसंस्करण के बाद आपूर्ति करने की जिम्मेदारी निभाती है। ऐसे में उसके कोल्ड स्टोरेज सिस्टम पर हुआ हमला स्वास्थ्य सेवाओं की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। Reuters+2
यूरोप में रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर हमलों से बढ़ी चिंता
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब यूरोप के कई देशों में सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेटर और फ्रीजर को भी साइबर हमलों का निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं में खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने वाली तापमान नियंत्रण प्रणालियों से छेड़छाड़ की गई और कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में सामान खराब हुआ। हालांकि, ब्लड बैंक और सुपरमार्केट पर हुए हमलों के बीच किसी साझा हमलावर या नेटवर्क की पुष्टि नहीं हुई है। reuters.com+2
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रभावित उपकरणों की रिमोट एक्सेस सुविधा बंद कर दी गई है। फिलहाल हमले के पीछे किसका हाथ है और सिस्टम में सेंध लगाने के लिए किस तकनीकी कमजोरी का इस्तेमाल किया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। reuters.com+2
साइबर सुरक्षा का बड़ा सबक
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उपकरणों को इंटरनेट के माध्यम से नियंत्रित करने की सुविधा कितनी सुरक्षित है। रक्त और प्लाज्मा जैसे संवेदनशील उत्पादों की सुरक्षा केवल भौतिक भंडारण पर नहीं, बल्कि डिजिटल निगरानी और नियंत्रण प्रणालियों की सुरक्षा पर भी निर्भर करती है। फ्रांस की इस घटना में समय रहते अलर्ट मिलने से बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन यह स्वास्थ्य संस्थानों के लिए साइबर सुरक्षा मजबूत करने की चेतावनी जरूर है।



