29 जून श्री महाकाल भस्म आरती शृंगार दर्शन : त्रिपुंड और ॐ से सजे महाकाल
श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण अष्टमी की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न
उज्जैन //( शिखर दर्शन )// मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से महाकाल का विधिवत अभिषेक पूजन किया गया। श्री महाकाल को भस्म चढ़ाई गई ।
मंदिर के गर्भगृह में पंडे-पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न किया। पूजन के दौरान दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत का प्रयोग किया गया। भगवान के मस्तक पर चांदी का त्रिपुंड, ॐ, भांग, चंदन और त्रिपुण्ड के साथ पुष्प अर्पित कर श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्पों से बनी माल धारण की। श्री महाकाल को विभिन्न प्रकार के फलों के साथ अवन्तिका नागरी की प्रसिद्ध मिठाइयों का भोग लगाया गया ।

भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर आत्मिक आनंद प्राप्त किया। भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर उनके कान मे अपनी मनोकामनाएं बोल कर भोले नाथ तक पँहुचाने के विनती की। इस विशेष अवसर पर सभी श्रद्धालुगण बाबा महाकाल के जयकारे भी लगा रहे थे । “जय जय श्री महाकाल” , “हर हर महादेव” , “हर हर शंभू” ,”ॐ नमः शिवाय” से पूरा मंदिर परिसर गुंजयमान हो रहा था ।
सप्ताह के इस पावन दिन पर बाबा महाकाल की आराधना के लिए दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना की। श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन ने न केवल उज्जैन की धार्मिक गरिमा को बढ़ाया, बल्कि भक्तों के मन में श्रद्धा और विश्वास की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
