मुर्गा लड़ाई की आड़ में लाखों का जुआ ! बीजापुर के रायगुड़ा में पुलिस की दबिश, 25 लाख तक नकदी और वाहन जब्त

छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगाना और आंध्रप्रदेश से भी पहुंचे थे जुआरी, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की कार्रवाई; एसपी ने की छापेमारी की पुष्टि
बीजापुर ( शिखर दर्शन ) // जिले में मुर्गा लड़ाई की आड़ में संचालित कथित जुए के बड़े अड्डे पर पुलिस ने छापेमारी कर लाखों रुपये की नकदी, मोबाइल फोन और कारें जब्त की हैं। कार्रवाई भोपालपट्टनम ब्लॉक के रायगुड़ा गांव में की गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मौके से करीब 20 से 25 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई है। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना और आंध्रप्रदेश से भी लोग पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि रायगुड़ा गांव में मुर्गा लड़ाई के नाम पर बड़े पैमाने पर जुए के दांव लगाए जा रहे थे। यहां लाखों रुपये का लेन-देन होने की सूचना पुलिस को मिली थी। मुखबिर से जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने टीम गठित की और मौके पर पहुंचकर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लोगों को पकड़ने के साथ नकदी और अन्य सामान जब्त किया गया।
एसपी ने की छापेमारी की पुष्टि
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम गठित की गई थी। टीम ने मौके पर दबिश दी, जहां से नकदी बरामद हुई है।

फिलहाल कार्रवाई और जांच जारी है। कितने लोगों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, कितनी कारें और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं तथा नकदी की अंतिम राशि कितनी है, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। शुरुआती तौर पर बताई गई 20 से 25 लाख रुपये की रकम को अंतिम जब्ती राशि नहीं माना जाना चाहिए।
मुर्गा लड़ाई और सट्टेबाजी पर कानून क्या कहता है ?
मुर्गों को आपस में लड़ाने के लिए उकसाना पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के प्रावधानों के दायरे में आता है। अधिनियम की धारा 11(1)(m)(ii) के तहत मनोरंजन के उद्देश्य से किसी पशु को दूसरे पशु से लड़ने के लिए उकसाना दंडनीय है।

आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से संबंधित मामलों में हैदराबाद हाईकोर्ट ने मुर्गा लड़ाई को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध माना था। वहीं, जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामले में स्थिति यथावत रखने का निर्देश दिया था और हाईकोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई के लिए कहा था। इसलिए इन आदेशों को पूरे देश में मुर्गा लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट के किसी एक सर्वव्यापी प्रतिबंध के रूप में बताना सही नहीं होगा।
रायगुड़ा में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि इस आयोजन में कौन-कौन शामिल था, जुए का कितना बड़ा नेटवर्क सक्रिय था और किन लोगों के खिलाफ किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।



