3 नवंबर महाकाल भस्म आरती: मस्तक पर ॐ और शेषनाग का दिव्य श्रृंगार, अलौकिक स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, यहां कीजिए दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके साथ ही भगवान महाकाल की भस्म आरती की तैयारियां शुरू हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजन के बीच बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान के मस्तक पर ॐ का चिह्न और शेषनाग अर्पित कर अलौकिक स्वरूप में सजाया गया।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूजन के पश्चात भांग, चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य श्रृंगार हुआ।
भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान और पूजन किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। विभिन्न आभूषणों और पुष्पों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही वजह है कि महाकाल की भस्म आरती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था और उत्साह रहता है।
जयकारों से गूंज उठा महाकाल मंदिर
मंगलवार सुबह आयोजित भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान होता रहा।



