शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 750 अंक लुढ़का, निफ्टी 22,600 के नीचे; एलएंडटी में 6% की छलांग

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों में सतर्कता, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली; जियो प्लेटफॉर्म्स की धमाकेदार शुरुआत पर भी बाजार की नजर
मुंबई ( शिखर दर्शन ) // भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही बिकवाली तेज हो गई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 750 अंक से अधिक टूटकर 72,841 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी 180 अंक से ज्यादा फिसलकर 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स की गिरावट एक समय 1,000 अंक तक पहुंचने की खबर रही। दूसरी ओर, बाजार में चौतरफा दबाव के बावजूद लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
वैश्विक बाजारों से मिल रहे संकेत, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके अलावा, आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट ने भी प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।
सेंसेक्स और निफ्टी का क्या रहा हाल ?
बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 750 अंक से अधिक गिरकर 72,841.26 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में भी 180 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,563.30 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
इससे पहले मंगलवार, 27 अक्टूबर को बाजार लगभग सपाट बंद हुआ था। सेंसेक्स 8.08 अंक की मामूली गिरावट के साथ 73,598.67 पर और निफ्टी 3.45 अंक टूटकर 22,749.75 पर बंद हुआ था। ऐसे में बुधवार को शुरुआती कारोबार में आई तेज गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार में गिरावट की तीन प्रमुख वजहें
1. कच्चा तेल 115 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
महंगे तेल से रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इन परिस्थितियों में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है।
2. आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली
बुधवार को बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में आई कमजोरी रही। शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयर करीब 4.3 प्रतिशत तक गिर गए। टेक महिंद्रा में लगभग 3.1 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में करीब 3.1 प्रतिशत और टीसीएस में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजार और वहां की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों की सतर्कता आईटी शेयरों पर भारी पड़ी। इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में बिकवाली से निफ्टी पर भी दबाव बढ़ा।
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर है। बाजार यह जानना चाहता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या निर्णय लेता है और आगे की नीति के बारे में क्या संकेत देता है।
अमेरिका में ब्याज दरों और भविष्य की आर्थिक नीति से जुड़े संकेत विदेशी निवेश के प्रवाह तथा वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से निवेशक बड़े फैसले से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं।
गिरते बाजार में एलएंडटी और बजाज ऑटो में तेजी
जहां प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे, वहीं कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। लार्सन एंड टुब्रो के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 6 प्रतिशत तक चढ़े। कंपनी के तिमाही नतीजों को इस तेजी की प्रमुख वजह बताया गया। बजाज ऑटो के शेयरों में भी लगभग 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
इसके विपरीत, आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी बनी रही। इससे साफ है कि बाजार की व्यापक गिरावट के बीच भी अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।
जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में दमदार शुरुआत
बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में सूचीबद्धता भी निवेशकों के लिए प्रमुख घटनाक्रम रही। कंपनी के शेयर 1,119 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले 1,358 रुपये पर सूचीबद्ध हुए। इस तरह शेयर ने करीब 21.36 प्रतिशत के प्रीमियम के साथ बाजार में शुरुआत की।
इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज, टीवीएस मोटर, हुंडई मोटर इंडिया और पिडिलाइट इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। कंपनियों के वित्तीय परिणाम और प्रबंधन की ओर से दिए जाने वाले संकेत संबंधित शेयरों की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
शेयर बाजार की अगली चाल के लिए कच्चे तेल की कीमतों, मध्य पूर्व के घटनाक्रम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और कंपनियों के तिमाही नतीजों को अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाएगी।
हालांकि, शुरुआती कारोबार में आई गिरावट के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बाजार आगे और टूटेगा या संभल जाएगा। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे ताजा बाजार भाव, कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं और अपने निवेश संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।


