मध्यप्रदेश

धर्म परिवर्तन के दबाव के मामले में पहली सजा ! आरोपी को 4 साल का सश्रम कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना

मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत विशेष अदालत का फैसला, पीड़िता को 25 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश; अन्य आरोपों में आरोपी को मिला संदेह का लाभ

ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत दोषसिद्धि का पहला मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। ग्वालियर की विशेष अदालत ने धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और निजी तस्वीरों व वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देने के मामले में आरोपी अमन शाह को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता को 25 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है।

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सिद्धि मिश्रा की अदालत में हुई। आरोपी अमन शाह, जिसकी उम्र 23 वर्ष बताई गई है, ग्वालियर का निवासी है। अदालत ने उसे मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 5 के तहत दोषी ठहराया।

अस्पताल में काम के दौरान हुई थी पहचान

प्रकरण के अनुसार, पीड़िता और आरोपी की पहचान अस्पताल में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती हुई, जिसके बाद आरोपी पर पीड़िता पर शादी के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता से धर्म परिवर्तन करने के लिए भी कहा था।

आरोप यह भी था कि आरोपी ने मोबाइल फोन में मौजूद पीड़िता की निजी तस्वीरें और वीडियो दिखाकर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने 26 नवंबर 2022 को अपराध दर्ज किया था। इसके बाद 10 मई 2023 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने का उल्लेख है। प्रकरण बहोड़ापुर थाना क्षेत्र से संबंधित बताया गया है।

अन्य गंभीर आरोपों में मिला संदेह का लाभ

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया। धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 5 के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए चार साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

हालांकि, भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन), 323 और 506 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66-सी और 67-के के तहत लगाए गए अन्य आरोपों में अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

पीड़िता को प्रतिकर देने का आदेश

अदालत ने दोषसिद्धि के साथ पीड़िता को 25 हजार रुपये प्रतिकर देने का निर्देश भी दिया है। इस मामले को मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत पहली सजा बताया जा रहा है। हालांकि, इसे राज्य में कानून के तहत पहली दोषसिद्धि मानने की पुष्टि के लिए आधिकारिक न्यायिक या सरकारी अभिलेख का सत्यापन आवश्यक है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!