कण-कण में महादेव, भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार से सजे बाबा महाकाल

17 अक्टूबर को शेषनाग के रजत मुकुट और पुष्पमालाओं से हुआ भगवान का अलौकिक श्रृंगार, जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का विशेष अभिषेक कर भव्य श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और जय श्री महाकाल के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
17 अक्टूबर, शनिवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक-पूजन संपन्न हुआ।
इसके बाद भगवान महाकाल को भांग और चंदन अर्पित कर आभूषणों तथा सुगंधित पुष्पों से दिव्य श्रृंगार किया गया।
शेषनाग के रजत मुकुट से सजे बाबा महाकाल
आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और सुगंधित फूलों से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
नंदी महाराज के दर्शन कर भक्तों ने मांगी मनोकामना
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के निराकार स्वरूप के साकार दर्शन होते हैं। सुबह की भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान मंदिर परिसर में लगातार “जय श्री महाकाल” के जयकारे गूंजते रहे। भक्ति और आस्था से सराबोर वातावरण में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार के दर्शन कर धन्य हुए।



