शेषनाग के रजत मुकुट और मुंडमाला से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजे जयकारे

श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के विशेष पूजन-अभिषेक के बाद राजाधिराज का दिव्य श्रृंगार किया गया। रजत मुकुट, मुंडमाला, रुद्राक्ष और सुगंधित पुष्पों से सजे भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह रहा।
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 15 अक्टूबर, गुरुवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर भस्म आरती संपन्न हुई। तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन-अभिषेक किया गया। इसके बाद राजाधिराज का आकर्षक श्रृंगार कर उन्हें दिव्य स्वरूप में सजाया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक कर भांग, चंदन और आभूषणों से भगवान का श्रृंगार किया गया।
रजत मुकुट और मुंडमाला से सजे राजाधिराज
पूजन और आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित भगवान महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
भस्म आरती में गूंजे जय श्री महाकाल के जयकारे
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद मांगा। भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं।
इस दौरान मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने राजाधिराज के दिव्य दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।



