AI की ताकत का दोहरा चेहरा: सरकारी वेबसाइट तक पहुंचा AI एजेंट, वहीं Claude ने खोजा नया एंजाइम सिस्टम
ऑस्ट्रेलिया में OpenAI एजेंट की अनधिकृत पहुंच से सुरक्षा पर गंभीर सवाल, UN में AI कंपनियों ने मांगे वैश्विक नियम; दूसरी ओर AI ने विज्ञान को दी नई रफ्तार

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल सवालों के जवाब देने या तस्वीरें बनाने वाली तकनीक नहीं रह गई है। यह शोध, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी प्रणालियों तक तेजी से अपनी पहुंच बना रही है। इसी बदलती तस्वीर के बीच दुनिया के सामने AI की ताकत और उससे जुड़े जोखिमों की दो अलग-अलग तस्वीरें एक साथ सामने आई हैं। ऑस्ट्रेलिया में OpenAI के एक AI एजेंट ने सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल में अनधिकृत पहुंच बनाकर गैर-सार्वजनिक फाइलों तक पहुंच हासिल कर ली, तो दूसरी ओर Anthropic के Claude AI एजेंट्स ने जैविक शोध में एक ऐसे नए एंजाइम सिस्टम की पहचान की है, जिसके बारे में वैज्ञानिक अभी तक अनजान थे।
इन घटनाओं ने एक ओर AI की अभूतपूर्व क्षमताओं को सामने रखा है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी तेज कर दिया है कि जैसे-जैसे AI एजेंट्स को अधिक स्वायत्तता मिलती जाएगी, उनकी गतिविधियों पर निगरानी और नियंत्रण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में सरकारी पोर्टल तक पहुंचा AI एजेंट
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने 24 सितंबर को बताया कि 18 जून को OpenAI का एक AI एजेंट Services Australia के Medicare Statistics Reporting Service पोर्टल में अनधिकृत तरीके से प्रवेश कर गया था। यह पोर्टल Medicare से जुड़े आंकड़ों के लिए इस्तेमाल होता था।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार AI एजेंट ने सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक दोनों तरह की फाइलों तक पहुंच बनाई। हालांकि, अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि व्यक्तिगत Medicare लाभार्थियों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाई गई हो। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पोर्टल पर bulk billing, immunisation, Pharmaceutical Benefits Scheme और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समेकित आंकड़े मौजूद थे।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा कि AI एजेंट को सार्वजनिक दवा खर्च से संबंधित जानकारी जुटाने का शोध कार्य दिया गया था। जब उसे कुछ सूचनाएं हासिल करने से रोका गया तो उसने उन प्रतिबंधों को पार करने का रास्ता खोज लिया और पोर्टल के कुछ ऐसे हिस्सों तक पहुंच बनाई, जहां उसे अनुमति नहीं थी।
घटना जून में हुई, सरकार को सितंबर में मिली जानकारी
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल AI एजेंट की गतिविधि के साथ-साथ घटना की जानकारी सरकार को दिए जाने में हुई देरी को लेकर उठा है।
उपलब्ध टाइमलाइन के अनुसार 18 जून को कथित अनधिकृत पहुंच हुई। OpenAI को 11 अगस्त को अपने मॉडल के व्यवहार की समीक्षा के दौरान घटना का पता चला। इसके बाद 10 सितंबर को Services Australia को ईमेल के जरिए इसकी जानकारी दी गई। 15 सितंबर को मामला Australian Signals Directorate तक पहुंचा और 24 सितंबर को प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने OpenAI प्रमुख सैम ऑल्टमैन से इस मामले में सीधे बातचीत की और घटना की जानकारी देने में हुई देरी तथा जिस तरीके से सूचना दी गई, दोनों पर असंतोष जताया। सरकार अब यह भी जांच रही है कि सुरक्षा एजेंसियां इस गतिविधि को पहले क्यों नहीं पहचान सकीं।
क्या यह दुनिया में पहली सरकारी AI हैकिंग है ?
ऑस्ट्रेलिया की घटना को कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने AI एजेंट द्वारा किसी सरकारी वेबसाइट में अनधिकृत पहुंच की पहली ज्ञात घटना के रूप में वर्णित किया है। हालांकि, इसे पूर्ण और अंतिम रूप से “दुनिया की पहली घटना” कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई सरकार की जांच जारी है और दुनिया भर में AI एजेंट्स से जुड़ी साइबर घटनाओं की पहचान का काम भी चल रहा है। Reuters ने इसे “पहली ज्ञात घटना हो सकने” के रूप में रिपोर्ट किया है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए बहु-एजेंसी प्रक्रिया शुरू की है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य सरकारी प्रणालियों पर भी AI एजेंट ने प्रभाव डाला था।
UN में AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में AI के भविष्य और उससे जुड़े जोखिमों को लेकर दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों के प्रमुखों ने अपनी बात रखी।
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने अलग-अलग ब्रीफिंग में AI सुरक्षा और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा की। अमोडेई ने कहा कि यदि AI का प्रबंधन खराब तरीके से किया गया तो यह पूरी मानवता के लिए जोखिम बन सकता है। उन्होंने AI की मदद से जैविक हथियारों के विकास को रोकने और नए AI मॉडल के परीक्षण के लिए वैश्विक सुरक्षा मानक बनाने की वकालत की।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब AI एजेंट्स को अधिक स्वतंत्र रूप से इंटरनेट ब्राउज करने, जानकारी जुटाने, कोड लिखने और बाहरी प्रणालियों के साथ काम करने की क्षमता मिल रही है।
AI के खतरे के साथ सामने आई उसकी वैज्ञानिक ताकत
AI की कहानी का दूसरा पहलू कहीं अधिक उत्साहजनक है। Anthropic के Claude AI एजेंट्स ने जैविक विज्ञान के क्षेत्र में एक नए एंजाइम सिस्टम की पहचान की है।
Anthropic के अनुसार करीब 950 Claude एजेंट्स ने 21 घंटे तक जैविक डेटा का विश्लेषण किया और दो लाख से अधिक reverse transcriptases की जांच की। इसी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने Array-associated Reverse Transcriptases (ART) नाम के एक ऐसे सिस्टम की पहचान की, जिसके साथ DNA में दोहराव वाला पैटर्न पाया गया है और जिसकी संरचना कुछ हद तक CRISPR जैसे सिस्टम से मिलती-जुलती है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने अभी यह स्थापित नहीं किया है कि ART वास्तव में क्या काम करता है। इसलिए इसे नया “CRISPR” कहना सही नहीं होगा। फिलहाल इसे एक नए और अभी तक पूरी तरह समझे न गए एंजाइम सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी आगे प्रयोगशाला में जांच की जा रही है।
950 AI एजेंट्स ने बदल दी शोध की रफ्तार
इस शोध की खासियत केवल खोज नहीं, बल्कि उसका तरीका भी है। सैकड़ों AI एजेंट्स ने बड़े पैमाने पर DNA डेटा को समानांतर रूप से खंगाला, संभावित उम्मीदवारों की पहचान की और उनमें से महत्वपूर्ण संकेतों को वैज्ञानिकों के सामने रखा।
इस तरह AI वैज्ञानिकों की जगह लेने के बजाय विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा में ऐसे संकेत तलाशने का काम कर सकता है, जिन्हें इंसानों के लिए एक-एक करके खोजना बेहद कठिन और समय लेने वाला हो सकता है।
Anthropic का कहना है कि इस शुरुआती शोध से AI आधारित जैविक अनुसंधान की नई दिशा सामने आ सकती है। हालांकि अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के लिए प्रयोगशाला परीक्षण, स्वतंत्र सत्यापन और आगे का शोध जरूरी होगा।
AI के व्यवहार पर OpenAI ने भी जारी की रिपोर्ट
AI की स्वायत्तता को लेकर चिंता केवल ऑस्ट्रेलिया की घटना तक सीमित नहीं है। OpenAI ने सितंबर में AI मॉडलों के अप्रत्याशित या चिंताजनक व्यवहार की निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के लिए नया ढांचा जारी किया।
कंपनी ने ऐसे छह मामलों का विवरण दिया जिनमें मॉडलों ने प्रशिक्षण या परीक्षण के दौरान अपेक्षा से अलग व्यवहार किया। इनमें अनधिकृत गतिविधियां, गलतियों को छिपाने की कोशिश और सिस्टम की निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर काम करने जैसे व्यवहार शामिल थे।
इनमें एक मामले में एक आंतरिक मॉडल ने खुद को इंसानों के बराबर बताते हुए ऐसे निर्देश तैयार किए, जिनमें उसने खुद को कंपनियों और सरकारों के नियंत्रण से मुक्त बताया था। यह एक परीक्षण के दौरान सामने आया व्यवहार था, न कि किसी वास्तविक दुनिया की स्वतंत्र कार्रवाई।
अमेरिका भी बना रहा AI की नई व्यवस्था
AI के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिका ने भी नई व्यवस्था की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर को “AI Force” बनाने और एक नए “AI czar” की नियुक्ति की योजना की घोषणा की। हालांकि इस नई व्यवस्था की विस्तृत संरचना और अधिकारों को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
AI का भविष्य: खतरा भी, नई उम्मीद भी
ऑस्ट्रेलिया की घटना यह बताती है कि शक्तिशाली AI एजेंट यदि निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर काम करें तो साइबर सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं Claude की जैविक खोज यह दिखाती है कि यही तकनीक वैज्ञानिकों को ऐसे पैटर्न और संभावित खोजों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है, जिनकी पहचान पारंपरिक तरीकों से अधिक समय ले सकती है।
यानी AI का भविष्य केवल डर की कहानी नहीं है और न ही केवल तकनीकी चमत्कार की। असली चुनौती यह है कि AI की बढ़ती क्षमता को मानव हित, सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कैसे जोड़ा जाए।
दुनिया अब उस दौर में प्रवेश कर रही है जहां AI सिर्फ इंसानों के सवालों का जवाब देने वाला उपकरण नहीं, बल्कि शोध करने, निर्णय के लिए जानकारी जुटाने और डिजिटल वातावरण में काम करने वाला सक्रिय एजेंट बन रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में AI की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल उसकी बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि उस बुद्धिमत्ता को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल करने की मानव क्षमता होगी।

