राष्ट्रपति भवन में गूंजी छत्तीसगढ़ की पहचान, पिथौरा के नन्हे विद्यार्थियों को राष्ट्रपति मुर्मू ने बांधी राखी

चार विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन में मनाया रक्षाबंधन, ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के संदेश से यादगार हुआ पल
पिथौरा ( शिखर दर्शन ) // रक्षाबंधन के अवसर पर महासमुंद जिले के पिथौरा के चार नन्हे विद्यार्थियों को देश के राष्ट्रपति भवन में पर्व मनाने का विशेष अवसर मिला। रामदर्शन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनकी कलाइयों पर राष्ट्रपति ने स्वयं राखी बांधी। इस दौरान राष्ट्रपति की आत्मीय बातचीत और ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ की बात ने बच्चों के साथ मौजूद लोगों के लिए इस पल को यादगार बना दिया।
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रामदर्शन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी आदित्य शर्मा, नितेश साहू, पुष्पराज ध्रुव और जयश बरिहा रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रपति भवन पहुंचे। उनके साथ विद्यालय के प्राचार्य जोगिंद्र मेहर भी मौजूद रहे। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के साथ रक्षाबंधन मनाने का अवसर मिलना विद्यार्थियों के लिए बेहद खास अनुभव रहा।
राष्ट्रपति ने पूछा- कहां से आए हो ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बच्चों से आत्मीयता के साथ बातचीत करते हुए पूछा कि वे कहां से आए हैं। बच्चों ने उत्साह के साथ जवाब दिया—“छत्तीसगढ़।” बच्चों के इस जवाब पर राष्ट्रपति मुस्कुराईं और उन्होंने कहा—“छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।” राष्ट्रपति के मुंह से छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ा यह वाक्य सुनकर वहां मौजूद लोगों में भी उत्साह देखने को मिला।

चार साल पहले शुरू हुआ विद्यालय, अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंची पहचान
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार रामदर्शन पब्लिक स्कूल की शुरुआत पिथौरा में करीब चार वर्ष पहले हुई थी। इतने कम समय में विद्यालय के विद्यार्थियों को राष्ट्रपति भवन में रक्षाबंधन मनाने का अवसर मिलना स्कूल के साथ-साथ पूरे पिथौरा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
विद्यालय के इन विद्यार्थियों की राष्ट्रपति भवन तक पहुंच ने स्थानीय स्तर पर भी उत्साह का माहौल बनाया है। बच्चों के इस अनुभव को विद्यालय प्रबंधन ने उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
पिथौरा से राष्ट्रपति भवन तक यादगार सफर
राष्ट्रपति भवन के भव्य परिसर में रक्षाबंधन मनाने और राष्ट्रपति से सीधे संवाद करने का अनुभव इन विद्यार्थियों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया। पिथौरा के इन नन्हे विद्यार्थियों ने न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे क्षेत्र और छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।
यह अवसर बच्चों के लिए उपलब्धि के साथ-साथ उनके भीतर आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा पैदा करने वाला भी साबित हुआ।




