दुर्ग संभाग

Endoscopic Camera कैमरे ने खोला सीलबंद पेपर का राज ! दुर्ग में तकनीक के सहारे हाईटेक पेपर लीक का खुलासा

दुर्ग ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आए हाईटेक पेपर लीक मामले ने परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के मुताबिक, भारती एग्रीकल्चर कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने बीएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर के एंटोमोलॉजी विषय के सीलबंद प्रश्नपत्र की जानकारी निकालने के लिए बेहद छोटे एंडोस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल किया। आरोप है कि प्रश्नपत्र का लिफाफा खोले बिना कैमरे की मदद से अंदर मौजूद सवालों को देखा गया और बाद में उन्हें लिखकर आगे पहुंचाया गया।

मामले के सामने आने के बाद अब यह जानना भी जरूरी हो गया है कि आखिर एंडोस्कोपिक कैमरा क्या होता है और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

एंडोस्कोपिक कैमरा क्या है?

एंडोस्कोपिक कैमरा एक बेहद छोटा और पतला कैमरा होता है, जिसे ऐसी संकरी या अंदरूनी जगहों को देखने के लिए डिजाइन किया जाता है, जहां सामान्य कैमरा आसानी से नहीं पहुंच सकता। इसमें एक पतली केबल या ट्यूब के सिरे पर छोटा कैमरा लगा होता है। कैमरे के साथ एलईडी लाइट भी लगी होती है, जिससे कम रोशनी वाली जगह के अंदर का दृश्य देखा जा सकता है।

मेडिकल क्षेत्र में इसका इस्तेमाल शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच के लिए किया जाता है। डॉक्टर एंडोस्कोप जैसी तकनीक के जरिए शरीर के कुछ हिस्सों के भीतर की स्थिति को स्क्रीन पर देख सकते हैं। इसके छोटे आकार और लचीली केबल की वजह से इसे सीमित जगहों तक पहुंचाना संभव होता है।

पेपर लीक में कैसे सामने आया कैमरे का इस्तेमाल?

पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपी के पास एंटोमोलॉजी विषय का सीलबंद प्रश्नपत्र पहुंचा था। आरोप है कि लिफाफा खोलने के बजाय उसमें बहुत छोटा छेद किया गया और उसी रास्ते से एंडोस्कोपिक कैमरे को अंदर पहुंचाकर प्रश्नपत्र को देखने की कोशिश की गई।

कैमरे में लगी रोशनी की मदद से अंदर मौजूद प्रश्नपत्र दिखाई देने लगा। इसके बाद कैमरे से मिलने वाली तस्वीर या वीडियो को देखकर प्रश्नपत्र के सवालों को अलग कागज पर लिखा गया। इस तरह बाहर से लिफाफा सीलबंद नजर आने के बावजूद उसके अंदर रखे प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल करने का आरोप है।

करीब 15 सवाल लिखकर आगे पहुंचाने का आरोप

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने कैमरे के जरिए प्रश्नपत्र देखकर करीब 15 सवाल एक अलग कागज पर लिखे। आरोप है कि बाद में इन सवालों को एक छात्र को 11 हजार रुपये में उपलब्ध कराया गया। इसके बाद यही जानकारी WhatsApp के माध्यम से अन्य लोगों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।

मेडिकल उपकरण का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल

एंडोस्कोपिक कैमरा मूल रूप से मेडिकल और तकनीकी जांच जैसे वैध उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण है। इसकी खासियत इसका छोटा कैमरा, पतली केबल और रोशनी की व्यवस्था है। दुर्ग के इस मामले में पुलिस का आरोप है कि इसी तकनीक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर सीलबंद प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई गई।

पेपर की सुरक्षा व्यवस्था बदलने की तैयारी

घटना के बाद प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। अब प्रश्नपत्रों की डिलीवरी के लिए ओटीपी आधारित डिजिटल एन्क्रिप्टेड व्यवस्था अपनाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र को निर्धारित समय और अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से ही खोलने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना है।

इस मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आधुनिक तकनीक जहां चिकित्सा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है, वहीं उसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए परीक्षा प्रणालियों को भी लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

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