पाकिस्तान के एयरबेस पर तुर्किए के सैन्य विमानों की बढ़ी हलचल, ड्रोन-एयर डिफेंस सप्लाई की अटकलें; बहावलपुर में जैश का ठिकाना भी फिर तैयार

( नई दिल्ली, 23 अगस्त ) // पाकिस्तान और तुर्किए के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के बीच पाकिस्तानी एयरबेस पर तुर्किए के सैन्य परिवहन विमानों की लगातार आवाजाही ने सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 से 21 अगस्त के बीच तुर्किए के कई सी-130 हरक्यूलिस विमानों ने पाकिस्तान के नूर खान और मसूर एयरबेस पर आवाजाही की। इस गतिविधि को सामान्य सैन्य परिवहन से अलग माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन उड़ानों के जरिए पाकिस्तान को ड्रोन, उनसे जुड़े उपकरण और संभावित रूप से एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति की जा सकती है। हालांकि, तुर्किए या पाकिस्तान की ओर से इन विमानों में हथियार अथवा ड्रोन भेजे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों पर आधारित जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।
नूर खान और मसूर एयरबेस पर लगातार आवाजाही
बताया जा रहा है कि तुर्किए के सी-130 हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमानों ने रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस और कराची के मसूर एयरबेस के बीच गतिविधियां कीं। सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी में इन उड़ानों को पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान पहले से ही तुर्किए के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। तुर्किए का बायराक्तर टीबी-2 ड्रोन सिस्टम भी पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं से जुड़ा रहा है। ऐसे में नई सैन्य खेप की अटकलों ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से इस गतिविधि को महत्वपूर्ण बना दिया है।
ड्रोन क्षमता बढ़ाने में जुटा पाकिस्तान
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन जैसी मानवरहित प्रणालियों की अपनी क्षमता बढ़ाने में रुचि रखता है। संभावित नई आपूर्ति को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान को एच-क्यू श्रृंखला की वायु रक्षा प्रणाली मिलने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में भी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान और तुर्किए के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच इस तरह की सैन्य गतिविधियों पर भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजर होना स्वाभाविक है। खासतौर पर ऐसे समय में जब पाकिस्तान अपनी ड्रोन और हवाई निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर खड़ा हुआ जैश का बहावलपुर ठिकाना
इसी बीच पाकिस्तान के बहावलपुर से जैश-ए-मोहम्मद के मरकज सुभान अल्लाह को लेकर भी गंभीर खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आई तस्वीरों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ यह परिसर दोबारा तैयार किया जा चुका है। ताजा फुटेज में परिसर के गुंबद, आंतरिक हिस्से और अन्य निर्माण कार्य पूरे होने का दावा किया गया है। हालांकि सामने आए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के इस परिसर को निशाना बनाया था। मई 2026 में सामने आई उपग्रह तस्वीरों में भी इस परिसर में पुनर्निर्माण गतिविधियां शुरू होने के संकेत मिले थे।
मरकज के पुनर्निर्माण में पाकिस्तानी मदद का भी दावा
कुछ रिपोर्ट्स में खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद को आर्थिक मदद दी गई और उसका एक हिस्सा मरकज के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल हुआ। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस कथित आर्थिक मदद की पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरकज के मुख्य हिस्से का पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि आसपास की कुछ क्षतिग्रस्त इमारतों को हटाकर नए निर्माण की गतिविधियां भी जारी बताई गई हैं।
एक तरफ सैन्य सहयोग, दूसरी तरफ आतंकी ढांचे की वापसी
पाकिस्तान में एक साथ सामने आ रही ये दोनों गतिविधियां—तुर्किए के सैन्य विमानों की आवाजाही और बहावलपुर में जैश के ठिकाने के पुनर्निर्माण की खबर—क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
हालांकि, दोनों मामलों में कई दावे अभी आधिकारिक पुष्टि के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। इसलिए इन घटनाओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक सूचनाओं और स्वतंत्र सत्यापन का इंतजार जरूरी होगा।



