15 जुलाई महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग, चंदन और रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर बुधवार तड़के भगवान महाकाल के मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का भांग, चंदन, रजत आभूषणों और पुष्पमालाओं से मनोहारी राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया।
आरती से पूर्व मंदिर के पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के उपरांत भगवान का भांग, चंदन एवं दिव्य आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा विभिन्न प्रकार की पुष्पमालाएं अर्पित कर भव्य अलंकरण किया गया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और पुण्य लाभ प्राप्त किया।
आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं प्रकट कीं। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे और भक्ति एवं श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।




