अन्तर्राष्ट्रीय

धुआं-धुआं मिडिल ईस्ट: अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई, खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा

जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना, यूएई से जुड़े तेल टैंकरों पर भी हमला

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कई मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया, जबकि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर बंदर अब्बास, किश द्वीप, बुशहर प्रांत के जम शहर और क़ेश्म द्वीप सहित कई स्थानों पर ड्रोन, मिसाइल और समुद्री सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में जवाबी हमले

अमेरिकी कार्रवाई के बाद आईआरजीसी ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को मार गिराया, जबकि बहरीन और कुवैत में भी हवाई हमले के सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

तेल टैंकरों पर हमला, भारतीय नाविक की मौत

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास यूएई से जुड़े दो तेल टैंकरों पर मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि आठ चालक दल के सदस्य घायल हुए हैं। घायलों में कई भारतीय भी शामिल हैं। इस घटना के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ट्रंप बोले— समझौता केवल एक परीक्षण था

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को केवल एक “परीक्षण” बताया। उनका कहना है कि ईरान समझौते की भावना पर खरा नहीं उतरा और उन्होंने पहले ही अंतिम समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया था।

पूरे क्षेत्र में बढ़ाई गई सुरक्षा

ताजा घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। विभिन्न देशों ने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

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