मध्यप्रदेश

30 लाख का सोलर प्लांट 9 साल से बंद: नगर निगम की लापरवाही से लाखों की सरकारी संपत्ति हुई बेकार

चालू होने के अगले ही दिन बंद हुआ 50 किलोवाट सोलर सिस्टम, अब जंग खा रहे पैनल; जवाबदेही पर उठे सवाल

जबलपुर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर निगम की एक इमारत की छत पर करीब 30 लाख रुपये की लागत से स्थापित 50 किलोवाट क्षमता का ऑन-ग्रिड सोलर पावर प्लांट पिछले नौ वर्षों से बंद पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि प्लांट शुरू होने के अगले ही दिन बंद कर दिया गया और उसके बाद इसे दोबारा चालू करने की कोई प्रभावी पहल नहीं की गई।

पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगाया गया था प्लांट

नगर निगम ने बिजली खर्च कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस सोलर प्लांट की स्थापना कराई थी। लेकिन करोड़ों की योजनाओं की निगरानी में लापरवाही का आलम यह रहा कि परियोजना शुरू होने के तुरंत बाद ही बंद हो गई और वर्षों तक उपेक्षा का शिकार बनी रही।

उपकरण गायब, छत पर बचा सिर्फ ढांचा

प्लांट लंबे समय तक बंद रहने के कारण इसके कई महत्वपूर्ण उपकरण, जिनमें मीटर, बैटरियां और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थी, गायब हो गई। वर्तमान में छत पर केवल सोलर पैनलों का ढांचा और जंग खा रहे उपकरण ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि पूरी परियोजना लगभग निष्प्रयोज्य हो चुकी है।

निगम कार्यालय से कुछ कदम दूर, फिर भी नहीं पड़ी नजर

सबसे गंभीर बात यह है कि यह सोलर प्लांट नगर निगम के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय से महज करीब 100 फीट की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद वर्षों तक किसी अधिकारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने इसकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। इससे सरकारी संपत्तियों के रखरखाव और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन से तैयार की गई इस परियोजना के बंद होने, उपकरणों के गायब होने और वर्षों तक रखरखाव नहीं होने की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही, यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो सोलर प्लांट को पुनः चालू कर सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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