हाथी प्रभावित वन क्षेत्र में बिजली लाइन विस्तार का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार और बिजली कंपनी से मांगा जवाब

धरमजयगढ़ के वन क्षेत्र में 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार पर उठे सवाल, नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में 33 केवी विद्युत लाइन विस्तार के दौरान नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के कथित उल्लंघन को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
सुनवाई के दौरान सरकार ने मांगा समय
सुनवाई में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया। वहीं, निजी कंपनी को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने एक सप्ताह की मोहलत दी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी कंपनी अपना जवाब पहले ही प्रस्तुत कर चुकी है और याचिकाकर्ता को उस पर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
वन स्वीकृति के बिना निर्माण का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं। साथ ही 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन के विस्तार में भी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
11 केवी लाइन के नाम पर 33 केवी लाइन बिछाने का आरोप
याचिकाकर्ता का दावा है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) के नए विद्युत खंभे लगाए गए। आरोप है कि बाद में इन्हीं खंभों का उपयोग निजी जल विद्युत परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए किया गया, ताकि अलग से वन भूमि डायवर्सन और अन्य वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके।
मिलीभगत के आरोपों की भी उठी जांच की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि परियोजना प्रबंधन ने वन विभाग और जिला प्रशासन से अनुमति के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां मिलने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका सीधा लाभ निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और हाईकोर्ट के निर्देश पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।



