बिलासपुर संभाग

बिजली बिलों पर बवाल: 45 लाख उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ, स्मार्ट मीटर और बढ़ी दरों को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

प्रेसवार्ता में धनेन्द्र साहू ने माना- कांग्रेस शासन में भी हुईं कुछ गलतियां, गौठानों पर हुआ था बड़ा खर्च

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // प्रदेश में बढ़ते बिजली बिलों और स्मार्ट मीटरों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के बीच प्रदेश के करीब 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को सामान्य से दो से तीन गुना अधिक बिजली बिल भेजे गए हैं, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और बिजली बिल हाफ योजना बंद किए जाने को लेकर सरकार को घेरा।

बिजली बिल हाफ योजना बंद होने से बढ़ा बोझ

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी बिजली बिल हाफ योजना बंद होने के बाद लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलना बंद हो गया है। पहले 400 यूनिट तक बिजली उपभोग करने वाले परिवारों को बड़ी छूट मिलती थी, लेकिन अब उन्हें पूरा बिल चुकाना पड़ रहा है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार बनने के बाद लगातार बिजली दरों में वृद्धि की जा रही है।

स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

प्रेसवार्ता में स्मार्ट मीटरों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां वास्तविक खपत की तुलना में अधिक रीडिंग दर्ज होने की शिकायतें मिल रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पुराने मीटरों की अपेक्षा स्मार्ट मीटर तेज गति से यूनिट रिकॉर्ड कर रहे हैं, जिसके कारण बिजली बिल अप्रत्याशित रूप से बढ़ गए हैं।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कई उपभोक्ताओं को एक ही अवधि के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन अलग-अलग बिल जारी किए जा रहे हैं। वहीं बिना जानकारी दिए स्वीकृत भार (सेंक्शन लोड) बढ़ाने और अतिरिक्त लोड के नाम पर अर्थदंड जोड़कर बिल भेजे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

बढ़ी बिजली दरों का हवाला

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि हाल ही में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है। गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट और कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तक दरें बढ़ाई गई हैं। इसके अलावा 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार लगाए जाने से उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ गया है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों में केवल एक बार मामूली वृद्धि की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार अल्प अवधि में कई बार दरों में संशोधन कर चुकी है।

अघोषित कटौती और महंगे बिलों से बढ़ी परेशानी

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। एक ओर उपभोक्ता बिजली संकट झेल रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें भारी-भरकम बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे कारोबारियों की परेशानी बढ़ी है।

स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि स्मार्ट मीटरों को लेकर व्यापक स्तर पर शिकायतें मिल रही हैं तो सरकार को इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच करानी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठे विवादों का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में भी इस व्यवस्था की समीक्षा करने और आवश्यक होने पर इसे वापस लेने की मांग की।

धनेन्द्र साहू के बयान ने खींचा ध्यान

प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेता धनेन्द्र साहू का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस शासनकाल में भी कुछ कमियां और गलतियां हुई थीं। उन्होंने कहा कि गौठान निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में कई स्थानों पर 50 लाख रुपये से लेकर लगभग एक करोड़ रुपये तक खर्च हुए तथा कुछ मामलों में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि जहां गड़बड़ी हुई है, वहां जांच होनी चाहिए, लेकिन सरकार जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास नहीं करे।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने राज्य सरकार से बिजली दरों में की गई वृद्धि वापस लेने, स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कराने और उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि आम जनता को राहत नहीं मिली तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

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