मिडिल-ईस्ट जंग की आग हिंद महासागर तक पहुंची, भारत से 1800 KM दूर बढ़ा खतरा

ईरान का डिएगो गार्सिया सैन्य बेस पर मिसाइल अटैक, होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत की सुरक्षा और व्यापार पर मंडराया नया खतरा
नई दिल्ली // ( शिखर दर्शन ) //
मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव अब खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब हिंद महासागर तक पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने इंडियन ओशन में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला कर दिया है, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई है।
इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट में बढ़े तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट खड़ा कर दिया था। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक है, जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ रहा है।
अब हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य हलचल ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है। डिएगो गार्सिया भारत से करीब 1800 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का टकराव सीधे तौर पर भारत की सामरिक और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
हिंद महासागर भारत के लिए एक अहम वॉटर गेटवे है। देश का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार (वॉल्यूम के आधार पर) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (मूल्य के आधार पर) इसी मार्ग से संचालित होता है। इसके अलावा भारत के करीब 80 प्रतिशत तेल आयात भी इसी समुद्री रास्ते से होते हैं। ऐसे में यहां अस्थिरता भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लू इकोनॉमी के तहत मत्स्य पालन, ऑयल एक्सप्लोरेशन और गहरे समुद्री खनन जैसी गतिविधियां भी इस क्षेत्र पर निर्भर हैं, जो भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा हैं।
चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का मुकाबला करने के लिए भारत पहले ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुका है। सेशेल्स, मॉरीशस और मालदीव जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीतियों के जरिए समुद्री संपर्क को मजबूत किया जा रहा है।
वर्तमान हालात को देखते हुए साफ है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकता है। हिंद महासागर में बढ़ती हलचल भारत के लिए आने वाले समय में एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

