19 जुलाई भस्म आरती: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, मस्तक पर चंद्र-बेलपत्र अर्पित कर हुई विशेष पूजा
उज्जैन (शिखर दर्शन) //
सावन मास के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार 19 जुलाई को कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर तड़के 3 बजे भगवान महाकाल के कपाट विधिपूर्वक खोले गए। प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान महाकाल का सबसे पहले जलाभिषेक किया गया, जिसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बना पंचामृत अर्पित कर पूजन सम्पन्न किया गया।
इस शुभ अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। उनके मस्तक पर बेलपत्र और चंद्र अर्पित किया गया। साथ ही बाबा को भस्म अर्पित की गई जो कि महाकाल मंदिर की परंपरा में विशिष्ट स्थान रखती है। भगवान को रजत शेषनाग मुकुट, चांदी की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी फूलों की माला पहनाई गई। इसके अतिरिक्त ड्रायफ्रूट से विशेष श्रृंगार कर भगवान को फल एवं मिष्ठान्न का भोग अर्पित किया गया।
सैकड़ों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। अल सुबह संपन्न हुई भस्म आरती में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के पास अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद भी मांगते नजर आए। मंदिर परिसर “जय महाकाल”, “हर हर शंभू”, “ॐ नमः शिवाय” जैसे जयघोषों से गूंजता रहा।
श्रद्धा, भक्ति और दिव्यता से ओतप्रोत इस आयोजन ने एक बार फिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को साक्षात करवा दिया।
