हेडिंग:इंदौर के सरकारी स्कूल में चौथी की छात्राओं से शोषण का मामला गंभीर, PMO ने मांगा जवाब, FIR पर उठे सवाल

इंदौर (शिखर दर्शन) // मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शासकीय स्कूल की चौथी कक्षा की छात्राओं के साथ यौन और मानसिक शोषण की शिकायतें सामने आई हैं। मामला इतना गंभीर है कि अब इसकी गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है। PMO ने इसे संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार को जांच कर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
RTI एक्टिविस्ट की शिकायत से खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्रसिंह यादव ने इस घटना को लेकर शिकायत की। उनकी शिकायत पर PMO ने गंभीरता दिखाई और मुख्यमंत्री कार्यालय के डायरेक्टर संदीप अस्थाना को पत्र भेजते हुए पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा।
23 छात्राओं के परिजनों ने लगाए आरोप
स्कूल की कुल 23 छात्राओं के परिजनों ने शिक्षकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्चियों के साथ अश्लील बातें की जाती हैं, उन्हें बर्बरता से पीटा जाता है और मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। यह आरोप सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
शिकायत के बाद अपर कलेक्टर ने इस मामले की जांच महिला एसडीएम को सौंपी। जांच रिपोर्ट में दो शिक्षकों को मानसिक रूप से विकृत बताया गया है, जो बच्चियों के साथ अशोभनीय और अमर्यादित व्यवहार कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों शिक्षकों ने अपने पद की गरिमा को तार-तार किया है और इन्हें तत्काल बर्खास्त कर बाउंडओवर किया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल – पोक्सो एक्ट में FIR क्यों नहीं?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतें स्थानीय थाने, महिला थाना और यहां तक कि एसपी स्तर तक पहुंचने के बावजूद अभी तक पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। यही वजह है कि अब यह मामला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक जा पहुंचा है, जिससे पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब आगे क्या?
PMO के संज्ञान में आने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन पर दबाव है कि वह पोक्सो के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को तत्काल निलंबित और गिरफ्तार करे, ताकि बच्चियों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
