EXCLUSIVE: युद्ध से पहले क्यों कराई जाती है सिविल डिफेंस मॉकड्रिल ? रिटायर्ड कर्नल से जानिए WAR के समय कौन-कौन सी सावधानियां जरूरी हैं
देशभर में 7 मई को सिविल डिफेंस मॉकड्रिल: रिटायर्ड कर्नल बोले – डरने की जरूरत नहीं, देश पूरी तरह सुरक्षित
भोपाल (शिखर दर्शन) // देशभर में बुधवार, 7 मई को एक साथ सिविल डिफेंस मॉकड्रिल आयोजित की जा रही है। मध्यप्रदेश के पांच प्रमुख शहरों — भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और कटनी — में भी यह मॉकड्रिल होगी। मॉकड्रिल के उद्देश्य और इसकी जरूरत को लेकर रिटायर्ड कर्नल डॉ. बीबी वत्स ने स्पष्ट किया कि इस अभ्यास से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह एक जरूरी प्रक्रिया है जिससे युद्ध या आपातकालीन स्थिति में आम नागरिकों को जागरूक किया जा सके।
“देश सुरक्षित है, डरने की कोई जरूरत नहीं”
रिटायर्ड कर्नल डॉ. वत्स ने कहा कि भारत आज एक मजबूत राष्ट्र है। हमारा केंद्रीय नेतृत्व और सैन्य ताकत दोनों ही बेहद सक्षम हैं। दुनिया के अधिकतर देश, दो को छोड़कर, आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े हैं। इसलिए जनता को डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है।
“जनता अलर्ट रहे, संदिग्ध गतिविधियों की दें सूचना”
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि हर व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए। यदि कहीं कोई संदिग्ध वस्तु या गतिविधि नजर आए, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए जिस पर कोई भी व्यक्ति तत्काल सूचना दे सके।
मॉकड्रिल क्यों जरूरी है?
कर्नल वत्स के अनुसार, मॉकड्रिल का उद्देश्य आम लोगों को आपातकालीन स्थिति में आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूक करना है। उदाहरण के लिए, यदि सायरन बजता है तो किस तरह का व्यवहार अपेक्षित है, ये जानना जरूरी है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत का एयर डिफेंस सिस्टम बहुत उन्नत है, जो किसी भी विदेशी ड्रोन या विमान को सीमा में घुसने से पहले ही नष्ट कर सकता है। इसकी किल प्रॉबेबिलिटी 90 प्रतिशत से अधिक है।
“MP पूरी तरह सुरक्षित, लेकिन सतर्क रहना जरूरी”
कर्नल वत्स ने कहा कि मध्य प्रदेश पूरी तरह से सुरक्षित है। पाकिस्तान जैसी ताकत यहां तक कभी नहीं पहुंच सकती, लेकिन दुश्मन को कभी कमतर नहीं आंकना चाहिए। यही कारण है कि हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने पहले समझाया था, लेकिन अब दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब मिलेगा।
“सेना ले रही रणनीतिक तैयारी का समय”
उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध जैसी तैयारी में समय लगता है। 1971 की लड़ाई का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी सेना को पाकिस्तान पर हमला करने में छह महीने लगे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं, अब आगे की रणनीति सेना के हाथ में है।
यह मॉकड्रिल कोई डर फैलाने की कवायद नहीं, बल्कि एक जागरूकता और तैयारी का अभ्यास है, जिससे देश की जनता को आपदा या संकट के समय सही निर्णय लेने में मदद मिल सके।
