सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन की कमी से मासूम की हालत बिगड़ी, विधायक ने कार्रवाई की चेतावनी दी
पिथौरा (शिखर दर्शन) // स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जहां एक तीन वर्षीय मासूम, हिमांशु मुखर्जी, को निमोनिया के इलाज के लिए लाए जाने के बाद चार घंटे तक ऑक्सीजन की सुविधा नहीं मिल पाई। परिजनों द्वारा लगातार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल में मौजूद ऑक्सीजन मशीनें खराब पाई गईं, और सिलेंडर काम नहीं कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, हिमांशु को सुबह 6 बजे सांस लेने में तकलीफ होने पर उसके परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल में तीन ऑक्सीजन मशीनें खराब थीं, और सिलेंडरों से गैस नहीं निकल रही थी। जब स्थिति गंभीर हुई, तो परिजनों ने मुख्यमंत्री चिकित्सा अधिकारी और विधायक डॉ. संपत अग्रवाल को सूचित किया। विधायक प्रतिनिधि अनुप अग्रवाल और रविंदर आजमानी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तब जाकर एक चालू मशीन से मासूम को ऑक्सीजन दी गई। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे की हालत में सुधार आया।
इस घटना के बाद यह सवाल उठता है कि कोविड काल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट और समाजसेवकों द्वारा दान की गई मशीनें आज क्यों काम नहीं कर रही हैं और क्यों अस्पताल की व्यवस्था इतनी लचर है।
बच्चे के पिता, ललित मुखर्जी, ने कहा कि यदि समय रहते ऑक्सीजन मिल जाती तो बच्चे की हालत इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की। विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
खंड चिकित्सा अधिकारी भरत भूषण कोसरिया ने कहा कि ऑक्सीजन की सभी मशीनें चालू हैं, लेकिन लो वोल्टेज के कारण मशीन काम नहीं कर रही होगी। उन्होंने बताया कि ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और स्टाफ को नोटिस दी जाएगी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में बच्चों को भर्ती नहीं किया जा सकता, क्योंकि अस्पताल के बाथरूम में पानी की सप्लाई और रिसाव की समस्या है।
यह घटना अस्पताल की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को उजागर करती है और स्थानीय प्रशासन की ओर से तत्काल सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करती है।
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