हिंद महासागर में चीन की घेरेबंदी की रणनीति: भारत-UAE की साझेदारी में श्रीलंका में बना बड़ा ऊर्जा प्लान, तीन देशों ने किया अहम समझौता
कोलंबो (शिखर दर्शन) // प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों तीन दिवसीय श्रीलंका दौरे पर हैं, जहां भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने वाले कई अहम समझौते हुए। शनिवार 5 अप्रैल को दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता के बाद रक्षा सहयोग, ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और समुद्री सीमाओं पर साझेदारी को लेकर ऐतिहासिक समझौते किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों और आपसी विश्वास पर बल देते हुए भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने इस दौरान डिजिटल माध्यम से सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया और इसे श्रीलंका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सामपुर सौर ऊर्जा संयंत्र श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सहायक सिद्ध होगा। त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने और बहु-उत्पाद पाइपलाइन के निर्माण जैसे कदम पूरे श्रीलंका के नागरिकों के लिए लाभकारी होंगे।”
भारत, यूएई और श्रीलंका के त्रिपक्षीय ऊर्जा समझौते
चीन के हिंद महासागर में बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में भारत और यूएई ने श्रीलंका के साथ मिलकर त्रिंकोमाली में ऊर्जा केंद्र विकसित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम को भारत की रणनीतिक नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासकर तब जब चीन की सरकारी कंपनी सिनोपेक ने हंबनटोटा में 3.2 अरब डॉलर की तेल रिफाइनरी परियोजना के लिए श्रीलंका से करार किया है।
सामरिक दृष्टि से अहम रक्षा समझौता
भारत और श्रीलंका के बीच हुए रक्षा समझौते को दोनों देशों के सुरक्षा हितों को मजबूती देने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और यह समझौता पारस्परिक रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब भारत ने चार दशक पहले श्रीलंका में शांति सेना भेजी थी।
ग्रिड कनेक्टिविटी से बढ़ेगा बिजली निर्यात
इस दौरान भारत और श्रीलंका के बीच पावर ग्रिड कनेक्टिविटी को लेकर भी समझौता हुआ, जिससे भविष्य में श्रीलंका को भारत से बिजली निर्यात का रास्ता खुलेगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि त्रिंकोमाली में बहु-उत्पाद पाइपलाइन, द्वितीय विश्व युद्ध के समय के टैंक फार्म का उपयोग और डिजिटलीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी समझौते हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पड़ोसी प्रथम नीति और विजन सागर (Security and Growth for All in the Region) का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका भारत की विदेश नीति में एक विशेष स्थान रखता है।
