श्री महाकाल मंदिर में रंग ले जाने पर प्रतिबंध, पिछली होली की घटना के बाद प्रशासन सख्त; केवल 1 लोटा केसर जल और रंग होगा अर्पित

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) // बीते वर्ष महाकालेश्वर मंदिर में होली के दौरान हुई आगजनी की घटना के बाद इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इस बार होली और रंगपंचमी के अवसर पर मंदिर में रंग-गुलाल ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। बाबा महाकाल को केवल सीमित मात्रा में केसर जल और हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा।
मंदिर परिसर में रंग उड़ाने और लगाने पर पूरी तरह रोक
मंगलवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में होलिका महोत्सव और रंगपंचमी को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें निर्णय लिया गया कि मंदिर के गर्भगृह, नंदी मंडपम्, गणेश मंडपम्, कार्तिकेय मंडपम् सहित संपूर्ण मंदिर परिसर में रंग-गुलाल लाने और उड़ाने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालु आपस में रंग नहीं लगा सकेंगे और किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की अनुमति नहीं होगी।
कड़ी निगरानी में होगा श्रद्धालुओं का प्रवेश
मंदिर में प्रवेश से पहले हर श्रद्धालु की जांच की जाएगी, ताकि कोई भी रंग-गुलाल या अन्य प्रतिबंधित वस्तु मंदिर परिसर में न ले जा सके। मंदिर प्रबंध समिति के कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी प्रवेश द्वार और मंदिर परिसर की कड़ी निगरानी की जाएगी। साथ ही, हर द्वार पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी नियमों का उल्लंघन न करे।
केवल प्रतीकात्मक रूप से होगा हर्बल गुलाल और केसर जल का अर्पण
श्री महाकालेश्वर मंदिर में 13 और 14 मार्च को होलिका पर्व तथा 19 मार्च को रंगपंचमी के अवसर पर विशेष परंपरा निभाई जाएगी। इस दौरान त्रिकाल आरती में सीमित मात्रा में हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। वहीं, रंगपंचमी के दिन भस्मारती में 1 लोटा केसर युक्त जल और संध्या आरती में केसर का रंग बाबा महाकाल को समर्पित किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह सभी सामग्री मंदिर समिति की ओर से चढ़ाई जाएगी, और किसी भी श्रद्धालु को अपने साथ रंग-गुलाल लाने की अनुमति नहीं होगी। इस सख्ती का उद्देश्य मंदिर परिसर की स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
