बिलासपुर संभाग

SECL मुख्यालय में साइबर सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम, IG राम गोपाल गर्ग ने बताए ठगी से बचने के उपाय

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) मुख्यालय बिलासपुर में केंद्रीय सतर्कता आयोग के मार्गदर्शन में चल रहे तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के तहत साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘साइबर जागृति अभियान’ के साथ समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराधों के बदलते तरीकों से परिचित कराना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए जागरूक करना था। इस दौरान बिलासपुर पुलिस ने ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ की शुरुआत भी की।

कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। वहीं बिलासपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में SECL के निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास और निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र समेत कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

फिशिंग और ऑनलाइन ठगी से बचने दी जानकारी

अपने संबोधन में आईजी राम गोपाल गर्ग ने साइबर अपराध के बदलते स्वरूप पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी और केवाईसी के नाम पर होने वाली ठगी, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन करते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने या संदिग्ध व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।

आईजी ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, संस्थान और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से जानकारी देने की अपील की।

साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान की शुरुआत

आईजी गर्ग ने ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ की जरूरत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

रजनेश सिंह ने भी सतर्क रहने की अपील की

विशिष्ट अतिथि डीआईजी एवं एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम में जन-जागरूकता की अहम भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की अपील की।

उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर पीड़ित को समय गंवाए बिना 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बनी रहे।

साइबर सुरक्षा को सुशासन से जोड़ा गया

SECL में चल रहे तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को सुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सुरक्षा, फिशिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। अधिकारियों और कर्मचारियों की शंकाओं के समाधान के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने तथा अपने परिवार, सहकर्मियों और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

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