बिलासपुर संभाग

21 साल बाद आरोपी को राहत: गांजे की खेती का आरोप साबित करने में नाकाम रही पुलिस, हाईकोर्ट ने किया बरी

घर के पीछे मिले थे गांजे के 425 पौधे, लेकिन जमीन पर आरोपी का अकेले कब्जा और खेती करने की भूमिका साबित नहीं कर सका अभियोजन

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गांजे की कथित खेती के 21 साल पुराने मामले में चत्तर सिंह को बरी कर दिया है। वर्ष 2004 में उसके घर के पीछे मक्के की फसल के बीच गांजे के 425 पौधे मिलने के बाद NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल घर के पीछे गांजे के पौधे मिलना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि उनकी खेती आरोपी ने ही की थी।

2004 में जब्त किए गए थे 425 पौधे

मामले के अनुसार, 21 अगस्त 2004 को पसान पुलिस को सूचना मिली थी कि चत्तर सिंह ने अपने घर के पीछे मक्के की फसल के बीच गांजे के पौधे लगा रखे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 425 पौधे जब्त किए। नमूनों की जांच में गांजे की पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायाधीश, कोरबा ने 28 जनवरी 2005 को चत्तर सिंह को NDPS एक्ट की धारा 20 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे चार साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना नहीं चुकाने पर छह महीने के अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया था।

जमीन पर अकेले कब्जे का प्रमाण नहीं

सजा के खिलाफ अपील में बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि जिस जमीन पर गांजे के पौधे मिले, उस पर चत्तर सिंह का अकेले कब्जा था। तलाशी, जब्ती और नमूने लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की। कोटवार सुपेद दास ने घर के पीछे गांजे के पौधे होने की बात कही, लेकिन यह नहीं बताया कि उन्हें चत्तर सिंह ने लगाया था। स्वतंत्र गवाह बलदेव ने भी जमीन के मालिकाना हक की जानकारी होने से इनकार किया।

पुलिस के बयान के अनुसार, आरोपी के पिता सुखराम जीवित थे और भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा नहीं हुआ था। पटवारी ने बताया कि जिस खसरा नंबर 74/1 में पौधे मिले थे, उसके राजस्व रिकॉर्ड में सुखराम का नाम दर्ज था।

पौधे मिलना ही खेती के अपराध का सबूत नहीं

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि गांजे के पौधे मिलना मात्र किसी व्यक्ति को खेती के अपराध में दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति ने ही पौधे लगाए या उनकी खेती की थी।

अदालत ने पाया कि चत्तर सिंह द्वारा गांजे की खेती किए जाने का आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सका। जमीन पर उसके अकेले कब्जे और पौधे लगाने में उसकी भूमिका को लेकर भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।

2005 की सजा निरस्त, आरोपी बरी

साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चत्तर सिंह की अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने 28 जनवरी 2005 को सुनाई गई सजा निरस्त करते हुए उसे आरोप से बरी कर दिया। इस तरह आरोपी को करीब 21 साल पुराने मामले में राहत मिली।

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