मस्तक पर चंद्र और रजत आभूषणों से सजे भगवान महाकाल, भस्म आरती में दिव्य स्वरूप के हुए दर्शन
भांग-चंदन और पुष्पमालाओं से हुआ मनमोहक श्रृंगार, जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष पूजन-अभिषेक कर मनमोहक श्रृंगार किया गया। मस्तक पर चंद्र अर्पित कर भगवान का दिव्य अलंकरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर तड़के मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
इसके बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन, आभूषणों और सुगंधित पुष्पमालाओं से विशेष श्रृंगार किया गया।
रजत मुकुट और मुंडमाल से हुआ अलंकरण
पूजन और आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से सजे भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल भक्तों को साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं।
इस दौरान मंदिर परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जय श्री महाकाल!



